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Amar Ujala Impact: ‘अमर उजाला’ की खबर का असर, सेंसर बोर्ड की रिवाइजिंग कमेटी ने पास की भोजपुरी फिल्म ‘जया’

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जया फिल्म - फोटो : अमर उजाला
20 अप्रैल को ‘अमर उजाला डॉट कॉम’ पर प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी सेंसर बोर्ड के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय ने न सिर्फ तुरत-फुरत अपनी पुनरीक्षण समिति (रिवाइजिंग कमेटी) को सक्रिय कर दिया है बल्कि, इस समिति ने बीते तीन महीने से लंबित पड़ी फिल्मों की स्क्रीनिंग भी शुरू कर दी है। शनिवार को इस समिति ने जनवरी से लंबित भोजपुरी फिल्म ‘जया’ देखी और फिल्म को कुछ बदलाव के साथ पास करने का फैसला दे दिया।
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जया फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
जानकारी के मुताबिक सामाजिक समरसता और महिला सशक्तिकरण पर बनी निर्देशक धीरू यादव की फिल्म ‘जया’ को सेंसर बोर्ड ने सिर्फ इसलिए सेंसर सर्टिफिकेट देने से इन्कार कर दिया था कि फिल्म की नायिका फिल्म के क्लाइमेक्स में अकेले रहने का फैसला कर लेती है। सेंसर बोर्ड की परीक्षण समिति (एग्जामिनिंग कमेटी) के सदस्यों का इस बारे में यही मानना रहा कि बिहार या पूर्वी उत्तर प्रदेश में बिना पति के सहारे किसी महिला का समाज में रहना ठीक नहीं है!

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जया फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी सेंसर बोर्ड के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारी फिल्म ‘आदिपुरुष’ को लेकर अदालत में हुई अपनी खिंचाई के बाद से अतिरिक्त सजग हो गए हैं। फिल्म ‘पटना शुक्ला’ में इसी के चलते बिहार यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर विहार यूनिवर्सिटी किया गया। निर्माता-निर्देशक के सी बोकाडिया की फिल्म ‘तीसरी बेगम’ से जय श्री राम हटाने का आदेश दिया गया। फिल्म ‘तीसरी बेगम’ के मामले की बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हो चुकी है और सरकारी वकील के लिए इस फिल्म की स्क्रीनिंग भी हो चुकी है।

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जया फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
भोजपुरी फिल्म ‘जया’ को लेकर फिल्म की परीक्षण समिति की आपत्तियों के खिलाफ इसके निर्माता रत्नाकर प्रसाद ने सेंसर बोर्ड में याचिका जनवरी में ही दाखिल कर दी थी। आवेदन में  इसे पुनरीक्षण समिति द्वारा देखने का आग्रह किया था, लेकिन उनके इस आवेदन पर तीन महीने बाद तक कोई कार्रवाई ही नहीं हुई। फिल्म के निर्देशक धीरू यादव के मुताबिक, सेंसर बोर्ड के अधिकारी पहले त्योहार का बहाना बनाते रहे और अब उनका कहना है कि सब चुनाव में व्यस्त हैं।
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जया फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इस बारे में ‘अमर उजाला डॉट कॉम’ ने सबसे पहले 20 अप्रैल को खबर प्रकाशित की थी। इस बारे में जानकारी मिलते ही सूचना और प्रसारण मंत्रालय में सेंसर बोर्ड से संबंधित काम देख रहे अधिकारियों ने इसका संज्ञान लिया और पुनरीक्षण समिति की बैठक कराने व लंबित फिल्मों को तुरंत देखे जाने के निर्देश जारी किए। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पुनरीक्षण समिति ने बीते हफ्ते से ही इन लंबित फिल्मों को देखना शुरू कर दिया है।
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जया फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
शनिवार को इसी सिलसिले में भोजपुरी फिल्म ‘जया’ की स्क्रीनिंग हुई। पुनरीक्षण समिति ने परीक्षण समिति की कई आपत्तियों को दरकिनार करते हुए फिल्म को यूए प्रमाण पत्र के साथ रिलीज करने की संस्तुति कर दी है। हालांकि, पुनरीक्षण समिति ने फिल्म में कुछ जातिसूचक शब्दों को हटाने या मूक करने के निर्देश दिए हैं, जिन्हें फिल्म निर्माता, निर्देशक ने मान लिया है।
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जया फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

कोरोना के समय मध्य प्रदेश में श्मशान घाट पर काम करने वाली एक महिला की खबर से प्रेरित फिल्म ‘जया’ की कहानी कुछ यूं है कि घर परिवार से दुत्कारी गई एक बेटी श्मशान घाट पर लोगों की चिताएं जलाने में मदद करने का काम करती है। वह अपने बेटे का भी यहीं अंतिम संस्कार खुद ही कर चुकी है। फिल्म में एक प्रेम कहानी भी है और अंत में फिल्म का नायक उसे लेने भी आता है लेकिन यह बेटी अपने आत्मसम्मान पर आंच नहीं आने देना चाहती। सामाजिक स्वीकार्यता मिलने की पहल को ठुकरा कर वह अपना जीवन अपने बूते व्यतीत करने का फैसला करती है। 

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