यामी गौतम
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आपने अपने प्रोसेस की बात की कि आपको लिखना और अपने विचार साझा करना पसंद है। क्या यह आदत हाल ही में शुरू हुई या हमेशा से रही है?
यह आदत हमेशा से रही है। शायद ‘विकी डोनर’ के समय से ही। लिखना मेरे लिए सिर्फ एक आदत नहीं है, बल्कि सोच को साफ करने का तरीका है। जब आप लिखते हैं, तो कई बार वो बातें बाहर आ जाती हैं जो शायद आप जुबान से कह नहीं पाते।
बीच-बीच में कुछ फिल्में ऐसी भी थीं जहां दिल से थोड़ी दुविधा थी कि करना चाहिए या नहीं, लेकिन उस समय के हिसाब से जो सही लगा, वही किया। पर जितनी भी फिल्में ऐसी रही हैं जिन्हें लोगों ने पसंद किया या जिन पर मुझे खुद गर्व है ...‘काबिल’, ‘उरी’, ‘बाला’, ‘थर्स डे’, ‘धूमधाम’, ‘लॉस्ट’, ‘आर्टिकल 370’ या अब ‘हक’ उन सब में मेरा यही प्रोसेस रहा है।
मैं स्क्रिप्ट बार-बार पढ़ती हूं, नोट्स बनाती हूं, कभी-कभी अपने विचार डायरेक्टर के साथ साझा करती हूं। अगर रात में भी कोई ख्याल आता है तो उसे तुरंत लिख लेती हूं या रिकॉर्ड कर लेती हूं ताकि वो कहीं खो न जाए। मेरे लिए ये तैयारी का नहीं, बल्कि किरदार के साथ एक रिश्ता बनाने का हिस्सा है।