राहुल ढोलकिया ने कॉलेज के दिनों में ही अपने पिता पैरी ढोलकिया की विज्ञापन एजेंसी में काम करना शुरू कर दिया। चैनल 4 के लिए बाबला सेन के साथ काम करते हुए उन्होंने कई वृत्तचित्र बनाए और उसके बाद मुंबई की एक विज्ञापन कंपनी में बतौर सहायक अपना करियर शुरू किया। न्यूयॉर्क से सिनेमा में परास्नातक करने के बाद परेश रावल और जिमी शेरगिल के साथ राहुल ने अपनी पहली फिल्म बनाई ‘कहता है दिल बार बार’। इससे पहले कुछ दिन उन्होंने एक टीवी चैनल टीवी एशिया भी चलाया। सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुके राहुल ढोलकिया ने अग्निशमन दल कर्मियों पर हिंदी सिनेमा की पहली फिल्म बनाई है, ‘अग्नि’। ‘परजानिया’ से बरास्ते ‘लम्हा’ और ‘रईस’ यहां तक पहुंचे राहुल से ये खास बातचीत की ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने।
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फिल्म रईस और अग्नि का पोस्टर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
2017 में शाहरुख खान की फिल्म ‘रईस’ का निर्देशन देने के बाद अब एक्सेल एंटरटेनमेंट ने आपको ‘अग्नि’ का जिम्मा सौंपा है। आप दोनों का रिश्ता काफी मजबूत लगता है?
जब मैंने फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी को ये विचार सुनाया तो वह तुरंत इसके लिए राजी हो गए। पहले दिन से वह इस फिल्म में मेरे साथ रहे। पटकथा लिखने में फरहान की सलाह मेरे बहुत काम आई। ये लोग कमाल के फिल्म निर्माता है।
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फायरमैन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
ममूटी की फिल्म ‘फायरमैन’ को छोड़ दें तो अग्निशमन दल पर कोई दूसरी भारतीय फिल्म तुरंत याद आती नहीं है, आपको ये विचार कैसे आया?
जब मैं विज्ञापन फिल्मों की दुनिया में था तो मैंने सुना था कि आइडिया की घंटी कभी भी बजती है। तो मुझे जहां तक याद पड़ता है, ये विचार उन्हीं दिनों का है जो मेरे अवचेतन मस्तिष्क में कहीं अटका रहा। उसके बाद जब मैंने इस पर फिल्म बनाने का सोचना शुरू किया तो इस पर शोध हुआ और ये फिल्म बनी।
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अग्नि
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हां, वो ट्रेलर में दिखता है कि आग का तापमान हजार डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा माने आग साजिशन लगाई गई है? आग की भी श्रेणियां होती हैं?
ये निर्भर करता है कि आग कितनी भयंकर है। आग को बुझाने के लिए कितने ट्रक बुलाए गए, इसका भी रिकॉर्ड होता है। कितने घंटे लगे आग में बुझाने में, इससे भी आग की गंभीरता पता चलती है।
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राहुल ढोलकिया
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, फायर हाइड्रेंट्स का जिक्र है क्या फिल्म में? अभी हाल के दिनों तक शहरों में फुटपाथों पर लाल रंग के पाइप निकले रहते थे अंग्रेजों के जमाने के बने हुए, जिनसे आग लगने के समय पानी लेने की व्यवस्था की गई थी..
हां, ये हमारी योजना में तो शामिल था, लेकिन अब ये कहीं हैं ही नहीं। फायर हाइड्रेंट्स हमारी कहानी के शुरू में थे लेकिन शोध के दौरान हमें इनसे हटना पड़ा। वो तो छोड़िए, अब भी जो आग बुझाने के इंतजाम हम करके रखते थे, उनका ही परीक्षण कहां होता है। अग्निशामक यंत्रों की गुणवत्ता के परीक्षण पर ध्यान कम ही दिया जाता है। उनकी टेस्टिंग वगैरह भी समय समय पर नहीं होती।
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परजानिया
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
गोधरा में ट्रेन में लगी आग के बाद की स्थिति पर आपने फिल्म ‘परजानिया’ बनाई और इसी घटना पर इसी साल दो और फिल्में बनी हैं, आपने देखी ये फिल्में? गोधरा हादसे पर फिल्म बनाने का आपका ‘ट्रिगर’ प्वाइंट क्या था?
नहीं, मैंने नहीं देखी ये फिल्में। मेरा फिल्म बनाने का मकसद ये था कि मेरे तो परिवार का, मेरा जो दोस्त था, उसका बेटा गुम हो गया था। ‘परजानिया’ एक तरह से उसी की कहानी थी। मकर संक्रांति पर हम सब साथ पतंग उड़ा रहे थे और अगले ही महीने ये हादसा हो गया। मेरे भीतर कहीं न कहीं ये अपराध बोध था। मैं गुजराती हूं तो मुझे लगा कि ये बात मुझे ही कहनी चाहिए। इसीलिए तो हम फिल्म स्कूल जाते हैं। हम नहीं कहेंगे तो फिर कौन कहेगा?
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राहुल ढोलकिया और शाहरुख खान
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अच्छा, ‘रईस’ की शूटिंग के दौरान शाहरुख खान पर पहला सीन कौन सा फिल्माया था आपने?
मैंने पहले तो हफ्ते-10 दिन की शूटिंग लय में आने के लिए दूसरे दृश्यों की शूटिंग में पूरी की थी। उसके बाद जब शाहरुख सेट पर आए तो मैंने फिल्म का वो वाला शॉट लगाया जिसमें वह क्रिकेट खेलते हुए शॉट मारते हैं और फिर आशिया के छत पर गेंद लेने जाते हैं क्योंकि वह उन्हें देखना चाहते हैं। शाहरुख क्रिकेट अच्छा खेलते हैं तो हमने शुरुआत खेल से ही की।
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रईस
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और इस फिल्म की लाइन तो कालजयी हो चुकी है कि ‘बनिये का दिमाग और मियां भाई की डेयरिंग’। शाहरुख ने लिखी ये लाइन?
नहीं, मैं और तीन दूसरे लेखक थे इस फिल्म में, हरित मेहता, आशीष वशी और नीरज शुक्ला। मियां भाई की डेयरिंग वाला हिस्सा मेरा था, बनिये का दिमाग किसने डाला, ये अब याद नहीं। अब क्या है कि फिल्म बनाते समय हमारा फोकस सिनेमा पर होता है, क्रेडिट लेने की तरफ हम जाते नहीं है तो बाद में याद ही नहीं रहता कि किसने क्या किया फिल्म बनाते समय। Pushpa 2: तेलंगाना में रात 1 बजे और सुबह 4 बजे भी होगा 'पुष्पा 2' का शो, जानिए कितनी रखी गई है टिकट की कीमत
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राहुल ढोलकिया
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
लेकिन, ये लाइनें ही तो सिनेमा को यादगार बनाती हैं..
हां, लोगों को सिनेमा याद रखना चाहिए। क्रेडिट के पीछे भागने वालों में मैं नहीं हूं।
कहता है दिल बार-बार का पोस्टर
- फोटो : सोशल मीडिया
राहुल ढोलकिया की फिल्मोग्राफी
साल
फिल्म
2002
कहता है दिल बार बार
2007
परजानिया
2010
लम्हा
2017
रईस
2024
अग्नि
(निर्देशक राहुल ढोलकिया और फिल्म ‘अग्नि’ के सितारों संयमी खेर, प्रतीक गांधी व दिव्येंदु का वीडियो इंटरव्यू आप सोमवार की सुबह 9 बजे अमर उजाला के फेसबुक और यूट्यूब चैनलों पर देख सकते हैं)