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Madhavan Exclusive: मैंने दर्शकों से संवाद करना कभी नहीं छोड़ा, किरदारों में प्रामाणिकता लाना मेरी जिम्मेदारी

सार

R Madhavan: अभिनेता आर माधवन ने हाल ही में बड़े पर्दे पर अपने 25 साल पूरे किए है, जिसे प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर जोरदार तरीके से सेलिब्रेट किया है। हालिया रिलीज फिल्म 'केसरी 2' में भी उनकी अदाकारी की जमकर तारीफ हो रही है।
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आर माधवन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अभिनेता रंगनाथन माधवन को इस महीने बड़े परदे पर उतरे 25 साल पूरे हुए तो उनके प्रशंसकों ने इसका सोशल मीडिया पर खूब जश्न मनाया। माधवन भी इस मौके पर नजर आए फिल्म ‘केसरी 2’ के एक अनोखे किरदार में। किरदारों के साथ प्रयोग करने में नए मानदंड बनाते जा रहे आर माधवन से एक खास मुलाकात की ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने।
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आर माधवन - फोटो : अमर उजाला
फिल्म टेस्ट को लेकर जो प्रतिक्रियाएं आपको मिल रही हैं, उनके बारे में क्या कहना है?
मुझे तो ये ईश्वर का आशीर्वाद सरीखा प्रतीत हो रहा है। मेरे अभिभावकों ने मुझे जो शिक्षा दी, जो संस्कार दिए और मेरे देश ने मुझे जो गौरव बख्शा है, वह सब एक सपना जैसा ही तो है मेरे लिए। खुली आंखों से देखे सपने सच होते हैं, ये मैं अब मानने लगा हूं। फिल्म को रिलीज होने के बाद का चौथा हफ्ता शुरू हो गया है और ये फिल्म अब भी नेटफ्लिक्स की टॉप 10 ट्रेडिंग फिल्मों में बनी हुई है।
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फिल्म 'टेस्ट' - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इस फिल्म में हाइड्रोफ्यूल बनाने की कोशिशों में लगा एक इंजीनियर रिश्वत के पैसे जुटाने के जो करता है, उसकी तैयारी कैसे की होगी आपने?
मेरा अभिनय को लेकर एक खास दृष्टिकोण शुरू से रहा है। अगर एक किरदार किसी ने सोचा है तो ये तो तय है कि ये विचार लेखक के मन में किसी न किसी बीज से ही पनपा होगा। मेरी कोशिश उस बीज तक, उसकी धरती तक और उसे खाद-पानी देने वाले कारकों को पहचानने की रहती है। बतौर अभिनेता इतना काम तो हमें करना ही चाहिए। बाकी काम फिल्म के निर्देशक ने कर दिया।
 

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'विक्रम वेधा' में आर माधवन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पहली बार फिल्म बनाने वाले निर्देशकों के साथ काम करने का आपका रिकॉर्ड चौंकाने वाला है..
हां, पहली फिल्म बनाने वाले निर्देशकों के लिए मुझे खासा लकी माना जाता है। फिल्म ‘टेस्ट’ से निर्देशन शुरू करने वाले एस शशिकांत ने ही मेरी तमिल फिल्म ‘विक्रम वेधा’ का निर्माण किया था। उनकी पृष्ठभूमि वास्तुशास्त्र की है। वह कमाल की इमारतें बनाते रहे हैं। फिर उन्होंने अपना खुद का स्टूडियो वाईनॉट स्टूडियोज खोला। फिल्म ‘टेस्ट’ बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म है। 25 साल के अपने करियर में मैंने तमाम नवोदित निर्देशकों के साथ काम किया है। मेरा मानना है कि हर नया निर्देशक अपने साथ एक नई सिनेमाई दृष्टि लेकर आता है।
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केसरी 2 - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, ऐसे नए नजरिये की इस समय सिनेमा को जरूरत भी है?
जी हां, बिल्कुल। अब फिल्म ‘केसरी 2’ के निर्देशक करण सिंह त्यागी को ही लीजिए। इनकी भी ये पहली फिल्म है लेकिन इस फिल्म के पहले 20 मिनट जो हैं, वह दिल और दिमाग हिला देने वाले हैं। परदे पर जो कुछ होता दिख रहा था, जब पहली बार मैंने इसे देखा तो मेरा तो गला रुंध गया। मेरे पास वाली कुर्सी पर बैठे अक्षय मेरा हाथ थामकर मुझे ढांढस बंधा रहे थे और मेरा पूरी शरीर कांप रहा था।
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हिसाब बराबर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इससे ठीक पहले आपने आम आदमी की दुखती रग को छूती फिल्म हिसाब बराबर भी की, विषयों का इतना भिन्न भिन्न चयन कैसे करते हैं आप?
एक राज की बात बताऊं आपको, शुक्ला जी? मैंने अपने बीते तीन दशकों में दर्शकों से संवाद करना कभी नहीं छोड़ा। लोग सोशल मीडिया के जरिये मुझसे संपर्क करते हैं। मुझे अपनी बात लिखकर भेजते हैं और मैं भी कोशिश करता हूं कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सकूं। उनसे बात कर सकूं। धरती से मेरा नाता लगातार बना रहता है। मौका मिलते ही मैं घास पर लेट जाता हूं। मैं हर तरह के किरदार करना चाहता हूं और ये तभी मुमकिन है जब मैं हर तरह के लोगों से लगातार मिलता रहूं।
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'शैतान' में आर माधवन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
शैतानटेस्ट और केसरी 2’ जैसे स्याह किरदारों में भी लोग आपको पसंद कर रहे हैं, इससे आपकी जिम्मेदारी दर्शकों के प्रति कितनी और बढ़ती है?
ये कठिन प्रश्न कर दिया आपने! लेकिन, हां, आपका कहना सही है। समाज में घुले मिले स्याह किरदारों को उजागर करती इन फिल्मों की कहानियों की यही अच्छी बात है। ये कहानियां हमें अपने कर्तव्यों के साथ साथ उन लोगों के प्रति भी सजग करती हैं, जिनका घोषित उद्देश्य तो कुछ और होता है लेकिन, इरादे उनके कुछ और ही होते हैं। मेरे प्रशंसकों ने मुझे इन स्याह किरदारों में सराहा, इसके लिए मैं उनका आजीवन आभारी रहूंगा।

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पत्नी व बेटे के साथ आर माधवन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, पिता के रूप में आप खुद को कितना जिम्मेदार मानते हैं? वेदांत को कितनी छूट देने में यकीन रखते हैं?
मेरा मानना है कि अभिभावकों की जिम्मेदारी अपनी संतान के सही लालन-पोषण की है। एक मूलभूत शिक्षा के बाद उन्हें अपने बच्चे से पूछना चाहिए कि वह क्या बनना चाहता है या चाहती है? अपनी पसंद उन पर थोपने की जरूरत नहीं है। अपने अधूरे सपने उनके जरिये पूरे करने की भी जरूरत नहीं है। वेदांत ने तैराकी को एक खेल की तरह चुना है। इसके अलावा वह अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे रहा है। इसमें छूट जैसी बात नहीं है। हमने उसे अपना ख्याल खुद रख सकने लायक बनाया और फिर छोड़ दिया आसमान में। वह घोंसला कहां बनाएगा, ये हवा का रुख और उसकी समेट मे आए तिनकों की संख्या से ही तय होगा।
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फिल्म 'टेस्ट' के एक सीन में आर माधवन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
किरदारों की प्रामाणिकता को लेकर हुए सर्वे में दर्शकों ने आपको अव्वल नंबर अभिनेता माना है, इसे लेकर किसी खास तरह की सजगता भी रखते हैं आप?
दर्शकों का किसी कलाकार पर भरोसा बहुत मुश्किल से बनता है। पान मसाला जैसे उत्पादों का विज्ञापन करके मैं इसे खोना नहीं चाहता। रही बातकिरदारों में प्रामाणिकता लाने की तो मुझे लगता है कि आप फिल्मों से बाहर क्या करते हैं, इसका भी बहुत कुछ असर सिनेमा में किसी कलाकार के किरदारों की प्रामाणिकता पर पड़ता है। 

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