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Jaideep Ahlawat Video Interview: शायद मेरे पिता समझ नहीं पाए कि उनको एक्टर बनना है, हमने खूब फिल्में साथ देखीं

सार

Jaideep Ahlawat Video Interview: जयदीप अहलावत ने हाल ही में अमर उजाला से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अपने बचपन में सिनेमा के प्रति अपनी रुचि, साहित्य से अपने पिता के माध्यम से जुड़ाव, और फौजी बनने की बजाय हीरो बनने के सफर के बारे में खुलकर चर्चा की।
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जयदीप अहलावत - फोटो : अमर उजाला
सिर्फ अपनी मेहनत और अपनी काबिलियत के बूते अभिनेता जयदीप अहलावत वहां आ पहुंचे हैं, जहां हिंदी सिनेमा में इसके पहले सिर्फ इरफान पहुंचे हैं। इरफान से तुलना करने पर वह हाथ जोड़कर तुरंत नतमस्तक भी हो जाते हैं। इस इंटरव्यू में जयदीप ने बचपन में सिनेमा के प्रति बने रुझान की वजह, साहित्य तक अपने पिता के जरिये बने पुल और फौजी बनने की बजाय हीरो बन जाने के अपने सफर के बारे में की है, ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल से ये खास बातचीत।
Pataal Lok Season 2 Trailer: पाताल लोक 2 का ट्रेलर रिलीज, केस सुलझाने के लिए नागालैंड पहुंचे 'हाथीराम चौधरी'
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पाताल लोक में जयदीप अहलावत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हाथीराम चौधरी वैसे तो शास्त्रों का लिखा भी व्हाट्सएप पर ही पढ़ता रहा है, अब पांच साल बाद उसका क्या नया धमाका है?
‘पाताल लोक’ सीरीज के रचयिता सुदीप शर्मा का बचपन गुवाहाटी में बीता है। इस बार सीरीज की कहानी उधर का रुख कर रही है। पिछली बार हाथीराम को दिल्ली से चित्रकूट तक ही जाना था तो वहां का भूगोल, वहां के इंसान जाने पहचाने से थे। भाषा की भी चुनौती नहीं थी। लेकिन, जब आप बिल्कुल अनजान जगह पर होते हैं तो ज्यादा रुआब चलता नहीं है। हाथीराम अब भी सच के पीछे ही है लेकिन इस बार उसके लिए परिस्थितियां बहुत विपरीत हैं। 
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जयदीप अहलावत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पांच साल बाद ‘पाताल लोक’ का दूसरी सीजन आ रहा है, और इन पांच साल में जयदीप अहलावत का मनोरंजन जगत में ओहदा ही बदल गया है, तब के और अब के हाथीराम में क्या कुछ फर्क आया है?
ये किरदार जो है वो कागजों से निकला हुआ है। कागज पर ये इतना सुंदर लिखा गया है कि अगर ये पटकथा मैं आपके सामने लाकर रख दूं तो आपको भी इसे निभाने में बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी। हाथीराम का किरदार किसी भी कलाकार को बिरले मिलने वाला मौका है। 

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जयदीप अहलावत और इश्वाक सिंह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, इस बार आपका जूनियर अब आपका सीनियर बन चुका है...
ऐसा होता है कई बार। यहां अंसारी और हाथीराम का जो रिश्ता है वह अंदरूनी रिश्ता है। बाहर की दुनिया में उनके समीकरण बदल चुके हैं। वह दिखता भी है ट्रेलर में। हाथीराम कोशिश भी करता है कि अंसारी को उसके नए ओहदे के हिसाब से इज्जत दे सके। लेकिन, ये इंसानी रिश्ते ऐसे होते हैं कि दुनिया के सामने निभाने बहुत मुश्किल होते हैं।
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पाताल लोक सीजन 2 स्टाकास्ट की ग्रुप फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

इस किरदार के नाम में ही कुछ अलग आकर्षण है, हाथी राम चौधरी! पहली बार जब आपने अपने किरदार का ये नाम सुना तो क्या प्रतिक्रिया थी?

यही कि बहुत कमाल का नाम है। अब ये सीरीज रचने वालों के दिमाग में कहां से आया, मुझे याद नहीं है। पता भी नहीं है। लेकिन, हां इस नाम पर टीम के बीच खूब चर्चा हुई थी, इतना मुझे अच्छी तरह से याद है। मैंने बहुत पहले अपनी मां से सुना था कि हाथी को भगवान ने आंखें बहुत छोटी दीं और कान बहुत बड़े बड़े ताकि वह अपना शरीर न देख पाए। अगर हाथी को ये पता चल जाए कि उसका शरीर कितना बड़ा है तो उसे संभालना बहुत मुश्किल होगा। 

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पिता के साथ जयदीप अहलावत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अपने पिता के साथ बैठकर आपने खूब फिल्में बचपन में देखीं और शायद ये फिल्में देखते देखते ही आप हीरो बन गए...
हां, पिताजी गुरुदत्त की फिल्में लाते थे। ‘प्यासा’ और ‘देवदास’ जैसी फिल्में घर पर ही वीडियो कैसेट प्लेयर चलाकर देखते थे। धर्मेंद्र की फिल्में भी हमने उन दिनों खूब देखीं। बहुत छोटा था मैं उन दिनों। अब मैं सोचता हूं तो समझ आता कि शायद मेरे पिता समझ नहीं पाए कि उनको एक्टर बनना है। लेकिन, जितना प्यार उनको सिनेमा से रहा, वह मुझे याद है। सिनेमा से मेरा पहला परिचय मेरे पिताजी ने ही कराया। साहित्य से मेरी दोस्ती कराने वाले भी मेरे पिता ही रहे।
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पत्नी के साथ जयदीप अहलावत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
एक अध्यापक पिता के बेटे ने जब हीरो बनने का फैसला किया तो कितना मुश्किल रहा होगा घरवालों को इसके बारे में बताना?
मुझे लगता है मैंने उस वक्त कुछ सोचा ही नहीं, क्योंकि मेरे दिमाग में कुछ और था नहीं। मैं अंग्रेजी से एमएम कर चुका था। भाई पहले से नौकरी कर रहा था। उनकी पत्नी भी नौकरीपेशा थी। घर पर मेरी कोई खास जिम्मेदारी थी नहीं। बड़ी बहनों की शादी हो चुकी थी। ये सब सोचकर मुझे थोड़ी हिम्मत आई। मेरी बात सुनी तो पिताजी थोड़ी देर के लिए स्तंभित से रहे फिर उनके मुंह से एक ही सवाल निकला, पक्का? हम दोनों का एक सा भाव था कि क्या हो जाएगा, देखा जाएगा!

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इरफान की तस्वीर के साथ जयदीप अहलावत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पाताल लोक सीरीज के निर्देशक अविनाश अरुण ने जब अपनी पहली हिंदी फिल्म थ्री ऑफ अस बनाई तो आपको ही हीरो चुना और इस फिल्म ने आपको इरफान के समानांतर ला खड़ा किया..
(जयदीप भाव विह्वल होकर दोनों हाथ जोड़ देते हैं..उनकी आंखें नम हैं.) हम पहली बार चंडीगढ़ में मिले थे शायद लिफ्ट में। हमारी वहां कुछ बहुत ज्यादा बात हुई नहीं। ‘पाताल लोक’ के दौरान ही हमारी जान पहचान हुई और फिर ‘थ्री ऑफ अस’ बनी। ये फिल्म हम सबने मिलकर बहुत दिल से बनाई। 
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थ्री ऑफ अस - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आप और शेफाली छाया जल्द ही हिसाब में भी साथ नजर आने वाले हैं?
हां, निर्माता-निर्देशक विपुल अमृतलाल शाह की ये फिल्म है। इस फिल्म की कहानी को लेकर कई तरह की धारणाएं और परिभाषाएं सोशल मीडिया व फिल्म बाजार में चल रही हैं। विपुल भाई की बतौर निर्माता बनाई फिल्म ‘कमांडो’ में पहले भी काम कर चुका हूं। इस बार उनके निर्देशन में काम करने का मौका मिला है। उन्होंने बहुत ही कमाल फिल्म बनाई है लेकिन इसके बारे में हम अगली बार विस्तार से बात करेंगे।
जयदीप अहलावत, तिलोत्तमा शोम और पाताललोक’ के रचयिता सुदीप शर्मा का वीडियो इंटरव्यू आप यहां देख सकते हैं..
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