जॉन अब्राहम
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गलतियों से सीखना ही बड़े होने की निशानी
ये पूछे जाने पर कि पचास साल की उम्र पार होने के बाद अमूमन इंसान का गुस्सा कम होने लगता है, तो क्या जॉन भी अपने भीतर ये बदलाव महसूस करते हैं। जॉन कहते हैं, “हां, मैं अब उतना गुस्सा नहीं करता। अपनी बात कहने में मैं अब भी पीछे नहीं रहता, लेकिन अब मैं अपने उत्तरों को डिप्लोमैटिक तरीके से पेश करना सीख गया हूं। पहले मैं जो कुछ भी मन में आता था, कह देता था, लेकिन मुझे लगता है गलतियों से सबक लेना ही किसी इंसान के प्रौढ़ होने की निशानी है।”