जय शंकर त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
उसके बाद..?
आईटीआई करने के बाद मुझे कानपुर में एक स्कूटर कंपनी में नौकरी भी मिल गई। लेकिन, भाग्य में अभिनय ही लिखा था। किसी काम से इलाहाबाद (अब प्रयागराज) आया था वहां पर नादिरा बब्बर का एक नाटक 'यहूदी की लड़की' देखा। ये 1997 के आस पास की बात है। नाटक खत्म होने पर उनसे मिला तो उन्होंने मुंबई में मिलने की बात कही। बस, नौकरी छोड़कर मैं मुंबई आ गया। नादिरा जी हर साल एक कार्यशाला का आयोजन करती हैं, और उसके माध्यम से ही अपने नाटकों के लिए कलाकारों का चयन करती हैं। मैंने नादिरा बब्बर के साथ करीब 45 नाटकों में काम किया। पहला नाटक था, 'एक घोड़ा तीन सवार'।