दिव्येंदु शर्मा
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यह किरदार मेरे लिए एक ज्वालामुखी की तरह था
अपने किरदार को लेकर एक्टर ने कहा कि यह किरदार मेरे लिए एक ज्वालामुखी की तरह था। जो अंदर ही अंदर दरक रहा होता है। मुझे पता था कि मुझे इस किरदार के साथ भीतर से जलना पड़ेगा। हालांकि, इसके साथ कई और दिलचस्प एलिमेंट्स भी थे। इतने डार्क किरदार के साथ ह्यूमर का होना एक अलग ही अनुभव था।
यह किरदार बहुत पर्सनल स्पेस से आता हुआ महसूस हुआ। एक ऐसा इंसान जो हर वक्त भीतर से फटने के कगार पर है। कई बार फटता है और कई बार खुद को रोक लेता है। लेकिन भीतर की आग लगातार जलती रहती है। यही बात मुझे सबसे ज्यादा आकर्षित करती थी।
अब मुझे पता है कि किरदार से बाहर वापस कैसे आना है
किरदार से बाहर निकलने की प्रक्रिया पर बात करते हुए दिव्येंदु कहते हैं कि पहले भी मैंने ऐसे किरदार निभाए हैं। जिनसे बाहर निकलने में मुझे काफी समय लगा था। उसी अनुभव से मैंने इस बार बहुत कुछ सीखा।
मुझे पहले से ही अंदाजा था कि यह किरदार उससे भी ज्यादा डार्क है। लेकिन इस बार मैं मानसिक रूप से तैयार था। मैंने यह तय किया था कि मैं खुद को इतना डूबने नहीं दूंगा। हालांकि, यह भी सच है कि इस किरदार में उतरना बहुत गहरा था। लेकिन इस बार मुझे यह पता था कि वहां से वापस कैसे आना है।