Kumar Atul
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
ये तो बड़ा फैसला रहा। यहां तक पहुंचने के पड़ाव अब तक क्या क्या रहे?
इसकी शुरुआत वैसे तो बचपन में ही कह सकते हैं कि कविताएं आदि लिखने से हो गई थी। पत्र-पत्रिकाओं में छपने भी लगा था। लेकिन, असल मोड़ आया जब मुझे शिकागो में कई कवि सम्मेलनों, मुशायरो और म्यूजिकल शोज का सूत्रधार बनने का मौका मिला। आतिफ असलम, नेहा कक्कड़ और प्रीतम का सानिध्य मिला और कदम इधर को चल पड़े। कुमार विश्वास, जावेद अख्तर, गुलजार, साहिर लुधियानवी, राहत इंदौरी, अहमद फराज और फैज की रचनाओं का मैं कायल रहा हूं। ये ही मेरी पाठशाला हैं।