फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Indira Tiwari Exclusive: भोपाल की इंदिरा ऐसे बनीं ‘बस्तर’ की लीड हीरोइन, भंसाली की ‘कमली’ का कमाल का सफरनामा

विज्ञापन
1 of 9
इंदिरा तिवारी - फोटो : अमर उजाला
नई सदी के शोमैन संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ दो साल पहले 25 फरवरी को ही रिलीज हुई। इस फिल्म में आलिया भट्ट के अलावा जिस दूसरी हीरोइन की सबसे ज्यादा चर्चा रही, वही इंदिरा तिवारी अब फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ की पहली हीरोइन बन चुकी हैं। अमरनाथ झा की लिखी और ‘द केरल स्टोरी’ वाले सुदीप्तो सेन निर्देशित इस बेहद सनसनीखेज फिल्म में इंदिरा ने अपनी उम्र से बड़ी एक ऐसी मां का किरदार निभाया है जिसके पति की नक्सलियों ने राष्ट्रीय ध्वज फहराने के चलते हत्या कर दी और जिसके बेटे को वे उठा ले गए। भोपाल के एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली इंदिरा को सिनेमा ने बाहें खोलकर स्वीकारा है और अब उनके कदम साउथ सिनेमा की तरफ भी बढ़ चले हैं। इंदिरा से ये एक्सक्लूसिव मुलाकात की ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 9
इंदिरा तिवारी अपनी मां और बहन के साथ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इंदिरा, शुरू आपके नाम से ही करते हैं, क्या इसकी भी कोई कहानी है?
लोगों को लगता होगा कि घरवालों ने मेरा ये नाम इंदिरा गांधी की शख्सियत से प्रभावित होकर रखा, लेकिन ये नाम मेरी मां डॉली तिवारी की उन सहेली का है जिन पर सरेराह हमला कर दिया गया था और जिन्हें बचाया नहीं जा सका। अपनी सहेली की याद में मां ने मेरा ये नाम रखा।
विज्ञापन

3 of 9
इंदिरा तिवारी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के हाथों ‘बालश्री’ पुरस्कार पाने से लेकर ‘गंगूबाई’ के लिए तमाम शोहरत और इकराम के बाद अब ‘बस्तर’ में लीड रोल! आपको अपना मुंबई में पहला दिन याद है?
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) की पढ़ाई के बाद मैं कोलकाता में अपनी पहली फिल्म की शूटिंग कर रही थी और वहीं मुझे मुंबई का बुलाया आया। मैं पहली बार मुंबई आई। टीवी की एक मुलाकात के बाद मैंने अगला ऑडिशन मुकेश छाबड़ा के यहां दिया। इसके बाद सड़क किनारे एक चाय की दुकान पर बैठी थी तो वहां बैठे लोगों से मुझे असहजता हुई और मैं हिम्मत करके सड़क के दूसरी तरफ एक फाइव स्टार रेस्तरां में चली गई। ईश्वरीय संकेत ही रहा होगा। वहीं, मुझे कास्टिंग डायरेक्टर श्रुति महाजन मिलीं।

4 of 9
इंदिरा तिवारी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
यानी कि पहले ही दिन सिक्सर..?
कह सकते हैं। न उस दिन मैं हिम्मत करके एक फाइव स्टार रेस्तरां में घुसती और न ही मुझे फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ मिलती। श्रुति महाजन से वहीं मुलाकात हुई। उन्होंने ही मेरा नाम आगे संजय (लीला भंसाली) सर को फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ के लिए बढ़ाया और मैं इस फिल्म के लिए शॉर्टलिस्ट हुई। इस फिल्म के लिए ही मैं मुंबई रहने आई और फिर यहीं की हो गई। संजय सर से मैंने बहुत कुछ सीखा।
विज्ञापन

5 of 9
‘सीरियस मेन’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और सुधीर मिश्रा से?
हां, उनके साथ जो पहली रिलीज फीचर फिल्म ‘सीरियस मेन’ मैंने की, वह मुझे मेरे मुंबई प्रवास के पहले दिन कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा को भेजी पासपोर्ट साइज फोटो के चलते मिली। ये फिल्म बनने के दौरान एक दिन शूटिंग रुकी तो मुझे संजय सर से मिलने का मौका मिला और मेरे अभिनय जीवन के नए मोड़ के रूप में मिली ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’।
विज्ञापन

6 of 9
इंदिरा तिवारी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ का जब से दूसरा टीजर आया है, आपके बारे में लोग खूब शोध कर रहे हैं, लेकिन, आप तो मुंबई की पार्टियों वगैरह में भी नहीं दिखतीं?
मेरा मुंबई शहर आना एक उद्देश्य से है और वह उद्देश्य जीवन के रंग देखना है। ये देखना है कि अभिनय के इस सागर में मेरी छोटी सी नौका कितनी सधी रहती है। ये शहर हर काबिल इंसान का सबसे प्यारा शहर है लेकिन यहां आकर खुद को भटकने से भी तो बचाए रखना है। मैं अपनी कला को निखारने और उसके बारे में ज्यादा से ज्यादा सीखने में समय लगाती हूं। खाली समय में कविताएं लिखती हूं। चित्र बनाती हूं। इन्हें अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर डालती हूं। बस!

विज्ञापन

7 of 9
'बस्तर' की शूटिंग के दौरान अदा के साथ इंदिरा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बीते साल की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ की हीरोइन अदा शर्मा ने आपको ‘बस्तर’ की असल हीरोइन बताया है, अभिनेत्रियों की अक्सर दिखने वाली अदावत में ये बात तो बहुत सकारात्मक हुई..
अदा शर्मा फिल्म क्षेत्र में मेरी सीनियर हैं। उनके लिए मेरे दिल में इसीलिए हमेशा सम्मान रहा है। उन्होंने एक नई लड़की के लिए अपने सोशल मीडिया पर ये लिखा, यही उनकी दरियादिली का प्रमाण है। हम सीधे सादे सच्चे लोग हैं, हमें कपटपूर्ण व्यवहार करना नहीं आता। और, एक जैसे लोग जब मिलते हैं तो ऐसी ही क्रियाएं होती हैं, जिसे नई पीढ़ी केमिस्ट्री कहकर बुलाती है।

8 of 9
इंदिरा तिवारी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
रंगमंच, नृत्य और संगीत की शिक्षा लेने के बाद सिनेमा के क्या जरूरी सबक अब तक आपको याद हुए?
सुमन मुखोपाध्याय के साथ मैंने पहली फिल्म ‘नजरबंद’ की, इसका प्रीमियर बुसान फिल्म फेस्टिवल में हुआ। उनसे मैंने भावों को संभालकर रखना सीखा। रिलीज मेरी पहली फिल्म ‘सीरियस मेन’ हुई नेटफ्लिक्स पर। इसके निर्देशक सुधीर मिश्रा से मैंने कैमरे से संवाद की अहमियत समझी और संजय लीला भंसाली ने मुझे सिखाया कि हर कलाकार की अपनी एक खूबी होती है और उसे इसे बचाकर ही रखना चाहिए। दूसरों जैसा बनने की कोशिश में कलाकार अपने जैसा भी नहीं रहता।
Shahid Kapoor Birthday: कभी बैकग्राउंड डांसर के रूप में काम करते थे शाहिद, आज नेटवर्थ जान उड़ जाएंगे होश
विज्ञापन

9 of 9
इंदिरा तिवारी, शाहरुख खान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, शाहरुख खान से क्या सीखा, कहां मिले वह आपको?
शाहरुख खान ने जो सबक सिनेमा का मुझे दिया, वह मेरे लिए सबसे बड़ा गुरुमंत्र बन चुका है। (अमिताभ) बच्चन सर की दिवाली पार्टी में वह मुझे मिले। मेरे कंधों पर हाथ रखकर उन्होंने मुझे इस शहर की आबोहवा को अपना बनाने की सलाह दी और समझाया कि एक अभिनेता सिर्फ निर्देशक की हाथ की कठपुतली होता है। निर्देशक के प्रति समर्पण ही अभिनय की असली साधना है। और, इसी पार्टी में मुझे पता चला था कि मैं फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ की कमली बन चुकी हूं।
Rakul Preet Singh: रकुल प्रीत सिंह ने ससुराल पहुंचकर बनाई पहली रसोई, इस व्यंजन से कराया परिवार का मुंह मीठा
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें