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Nikhil Bhat Interview: तेज रफ्तार से दर्शकों का अनुभव आगे ले जाएगी ‘किल’, ‘अपूर्वा’ और इसमें बस यही साम्यता

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निखिल नागेश भट - फोटो : अमर उजाला
पिछले साल जब देश में क्रिकेट वर्ल्डकप की गहमागहमी रही तो इसे प्रसारित करने वाले ओटीटी डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर ही एक फिल्म रिलीज हुई ‘अपूर्वा’। अब जबकि एक और क्रिकेट वर्ल्ड कप का खुमार अभी तक दर्शकों पर कायम है तो ‘अपूर्वा’ के ही निर्देशक निखिल नागेश भट की अगली फिल्म ‘किल’ के स्पेशल शोज पूरे देश में होने शुरू हो चुके हैं। फिल्म शुक्रवार को रिलीज हो रही है और ‘कल्कि 2898 एडी’ के लिए अभी से चुनौती बनती मानी जा रही है। इसी के साथ रिलीज हो रही एक्शन स्टार अजय देवगन की तबू के साथ बनी फिल्म ‘औरों में कहां दम था’ के कलेक्शन पर भी इसका सीधा असर पड़ने जा रहा है। निखिल नागेश भट से ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल की एक खास मुलाकात...
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अपूर्वा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपकी पिछली फिल्म ‘अपूर्वा’ की सबसे बड़ी खासियत इसका एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में सीमित रहना और इसमें गिनती के कलाकार होना है, और ऐसा ही ताना बाना ‘किल’ का भी नजर आ रहा है..
फिल्म ‘किल’ की कहानी भी एक चलती ट्रेन पर घटती कहानी है। ‘अपूर्वा’ की कहानी भागती जिंदगी के बीच हुए एक हादसे की कहानी है। दोनों में बस इतनी ही साम्यता मैं मान सकता हूं, बाकी दोनों फिल्मों का इतिहास, भूगोल, गणित, भौतिकी, रसायन शास्त्र सब अलग है। यहां कलाकारों के बीच जो केमिस्ट्री है, वह घातक है। लक्ष्य लालवानी को मैंने एक्शन के साथ पेश किया है, लेकिन इस अभिनेता में अभी बहुत कुछ गुंजाइश बाकी है।
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अपूर्वा के सेट पर निखिल नागेश भट - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
‘अपूर्वा’ अब देखते हैं तो क्या लगता है और बेहतर हो सकती थी ये फिल्म?
कोई फिल्मकार कभी ये नहीं कह सकता कि उसने जो फिल्म बनाई, वह सौ फीसदी संपूर्ण फिल्म है। मेरी फिल्म में भी एक दो खामियां हैं, जो मैंने समझ ली हैं और लोगों का फीडबैक इस बारे में बहुत मददगार भी रहा है। मेरी कोशिश रहेगी कि इन खामियों को मैं अपनी अगली फिल्म में दूर करूं। अपने दर्शकों की अपेक्षाओं पर और खरा उतर सकूं।

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निखिल नागेश भट - फोटो : इंस्टाग्राम
हां, फिल्म ‘किल’ को लेकर तो दर्शकों में गजब का उत्साह भी है। क्या भारतीय दर्शकों को भी हिंसक एक्शन फिल्में पसंद आने लगी हैं?
मुझे नहीं लगता कि ये कोई नया चलन है। बच्चे वीडियो गेम खेलकर अपने दिल की भावनाएं खर्च करते हैं। बड़े यही काम सिनेमाहॉल में दूसरे तमाम दर्शकों के साथ करते हैं। हमें अपना इमोशनल रिलीज तो चाहिए ही चाहिए होता है। तो अगर ‘किल’ या ‘एनिमल’ जैसी फिल्में इंसान के गुस्से को सिनेमाहॉल में निकाल देने में मदद कर रही हैं तो ऐसे लोग बाहर आकर बहुत सरलता से अपनी आगे की जिंदगी में बढ़ सकते हैं।
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किल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और कहानी का सूत्र क्या है फिल्म ‘किल’ का?
रांची से निकली राजधानी एक्सप्रेस की मुगलसराय स्टेशन पहुंचने से पहले के तीन घंटे की ये कहानी है और इस कहानी में ऐसा एक्शन है जिसे हाल फिलहाल के दिनों में भारतीय सिनेमा में देखा नहीं गया। फिल्म में लक्ष्य और राघव जुयाल मुख्य भूमिकाओं में हैं और इसका एक्शन चूंकि एक चलती ट्रेन की कहानी का अहम हिस्सा है, लिहाजा मुझे लगता है कि ये फिल्म दर्शकों का अनुभव बहुत रफ्तार से आगे ले जाएगी।
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निखिल नागेश भट - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपके सरनेम से लगता है कि आप जम्मू कश्मीर या गुजरात से हैं?
वैसे तो ये नाम भट्ट नहीं बल्कि भट ही है और मैं कुल से कोंकणस्थ ब्राह्मण हूं। परवरिश मेरी बिहार में हुई। सिंधिया राजघराने की मदद के लिए मराठों का जाना तो आपको याद ही होगा। वहां महाराष्ट्र से लड़ने गए तमाम मराठा परिवार फिर वहीं उत्तर भारत में ही बस गए। हमारा परिवार बिहारशरीफ में बसा। दादा मेरे वहां के नामी वकील रहे। पिताजी ने भी वकालत की। एक चाचा हमारे जज बने।
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निखिल नागेश भट - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बड़ा भाई भी शायद वकील है, फिर वकीलों के परिवार में ये फिल्ममेकर कैसे..?
ये भी दिलचस्प कहानी है। कोशिश तो मैंने भी की थी वकील बनने की। हालांकि, उससे पहले घरवालों के दबाव में मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं भी दी। फिर साइंस से मोह टूटा तो कॉमर्स से स्नातक किया। एलएलबी भी दो साल पढ़ा लेकिन उसमें मन नहीं लगा तो मॉस कॉम में दाखिला ले लिया। नोएडा में जी न्यूज की इंटर्नशिप की। लेकिन जब मैं मुंबई आया और एमटीवी से जुड़ा तो मुझे समझ आया कि मुझे जाना कहां है।

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निखिल नागेश भट - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
क्या आपकी शुरुआत अनुराग कश्यप की फिल्म ‘ब्लैक फ्राइडे’ से हुई है?
जी नहीं। उन दिनों में मिडडे में काम करता था और वहीं मुझे अंडरवर्ल्ड पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाने का मौका मिला। उसमें एक हिस्सा बबलू श्रीवास्तव के ऊपर भी था। हिंदी मेरी अच्छी थी तो मैंने इसकी पटकथा लिखी थी और बात निर्देशन की आई तो मुझसे कहा गया कि लिख लिया है तो बना भी लो। ‘ब्लैक फ्राइडे’ के निर्माता ही मेरे मिडडे में बॉस थे। इस फिल्म से मेरे जुड़ने तक ये फिल्म बन चुकी थी। मैंने और मेरे मित्र देबोलय ने इस फिल्म के ट्रेलर काटे थे और इसकी पैकेजिंग में मदद की थी।
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निखिल नागेश भट - फोटो : इंस्टाग्राम
मतलब कि अनुराग कश्यप स्कूल ऑफ फिल्ममेकिंग से आपका नाता रहा नहीं..?
जी यही कह सकते हैं। मैं गाहे बेगाहे उनसे मिलता रहा हूं लेकिन उनके साथ काम कभी नहीं किया। हम लोग विदेश से फिल्म का प्रीमियर करके लौटे थे तो उनका फोन आया और उन्होंने ये फिल्म देखने की इच्छा जताई।
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