मुमताज 60 के दशक से फिल्मों में थीं और 70 के दशक तक आते आते उनका अपना रुतबा और स्टारडम अपनी चरम सीमा पर था। मुमताज को लगने लगा था कि उनका स्टारडम उनसे कोई नहीं छीन पाएगा, लेकिन उनका ये सपना जीनत अमान ने तोड़ दिया।
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zeenat aman
जीनत ने रातोंरात मुमताज के स्टारडम को छीन लिया था और हिंदी सिनेमा की पॉपुलर और बोल्ड हीरोइन बन गईं..एक ऐसी हीरोइन जिसने देव आनंद से लेकर राजकपूर, शशि कपूर, जितेंद्र और अमिताभ बच्चन तक के साथ काम किया।
आखिर कैसे छीना जीनत ने मुमताज का ताज ?
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जीनत अमान और देव आनंद
ये तब की बात है जब देव आनंद 'हरे रामा हरे कृष्णा' बना रहे थे। चूंकि मुमताज उस दौर की टॉप हीरोइन थीं इसलिए उन्होंने मुमताज को फिल्म में लीड हीरोइन ले लिया। अब समस्या आई बहन के किरदार की। देव आनंद को ऐसी हीरोइन चाहिए थी जो उनकी बहन के किरदार को निभा सके। काफी मशक्कत के बाद भी देव आनंद को उस किरदार के लिए कोई लड़की नहीं मिली।
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जीनत अमान
- फोटो : social media
एक दिन अचानक उनकी मुलाकात जीनत अमान से हुई। जीनत उस वक्त इंडस्ट्री में नई थीं और दो-तीन फिल्मों में ही काम किया था। जीनत भी अपने कदम जमाने के लिए हाथ-पैर मार रहीं थीं। जीनत को देखते ही देव आनंद ने फैसला कर लिया कि जीनत को ही अपनी बहन बनाएंगे।
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मुमताज
मुमताज को जब पता चला कि जीनत अमान को फिल्म में बहन के किरदार के लिए साइन किया गया तो उन्हें कोई खास परेशानी नहीं हुई। मुमताज को लगा वो तो टॉप की हीरोइन हैं जबकि जीनत नई हैं, ऐसे में जीनत से उन्हें कोई खतरा नहीं होगा। लेकिन जल्द ही मुमताज की ये गलतफहमी दूर हो गई।
फिल्म जब रिलीज हुई तो काफी हिट रही, लेकिन इसमें सबसे ज्यादा फायदा जीनत अमान को हुआ जबकि मुमताज एक तरह से खो ही गईं।
फिल्म का गाना 'हरे रामा हरे कृष्णा' खूब पॉपुलर हुआ और देव आनंद के साथ उनकी केमेस्ट्री को भी खूब पसंद किया गया। इस फिल्म की जबरदस्त सक्सेस के बाद निर्माता-निर्देशकों ने देव आनंद और जीनत की जोड़ी को दर्जनों फिल्मों में साइन किया गया जिनमें से कई हिट रहीं।
लगातार हिट देकर जीनत अमान उस दौर में बॉक्स ऑफिस क्वीन बन गईं और इस तरह उन्होंने मुमताज के स्टारडम को छीन लिया और उन्हें आउट कर दिया।