फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जायरा वसीम ने फेसबुक पर लिखी ये पोस्ट और कर दिया बॉलीवुड छोड़ने का ऐलान

Sun, 30 Jun 2019 05:44 PM IST
अपूर्वा राय बीबीसी हिंदी
विज्ञापन
1 of 10
जायरा वसीम - फोटो : instagram

फिल्म 'दंगल' और 'सीक्रेट सुपरस्टार' जैसी फिल्मों से चर्चित हुईं बाल अदाकारा ज़ायरा वसीम ने बॉलीवुड को अलविदा कह दिया है। फेसबुक पर लिखी एक लंबी पोस्ट में उन्होंने कहा है कि अपने धर्म और अल्लाह के लिए ये फैसला ले रही हैं।

पढ़िए उनके पोस्ट के अहम हिस्से

पाँच साल पहले मैंने एक फैसला किया था, जिसने हमेशा के लिए मेरा जीवन बदल दिया था। मैंने बॉलीवुड में कदम रखा और इससे मेरे लिए अपार लोकप्रियता के दरवाजे खुले। मैं जनता के ध्यान का केंद्र बनने लगी। मुझे कामयाबी की तरह पेश किया गया और अक्सर युवाओं के लिए रोल मॉडल बताया जाने लगा। हालांकि मैं कभी ये नहीं करना चाहती थी और ऐसा नहीं बनना चाहती थी। खासकर कामयाबी और नाकामी को लेकर मेरे विचार ऐसे नहीं थे, जिन्हें मैंने खोजना और समझना शुरू ही किया था।

विज्ञापन

2 of 10
Zaira Wasim - फोटो : Twitter

आज जब मैंने बॉलीवुड में पांच साल पूरे कर लिए हैं तब मैं ये बात स्वीकार करना चाहती हूं कि इस पहचान के साथ, यानी अपने काम के साथ सच में ख़ुश नहीं हूं। लंबे अर्से से मैं ये महसूस कर रही हूं कि मैंने कुछ और बनने के लिए संघर्ष किया है। मैंने अब उन चीज़ों को खोजना और समझना शुरू किया जिन चीज़ों के लिए मैंने अपना समय, प्रयास और भावनाएं समर्पित की हैं। इस नई लाइफ़स्टाइल को समझा तो मुझे अहसास हुआ कि भले ही मैं यहां पूरी तरह से फिट बैठती हूं, लेकिन मैं यहां के लिए नहीं बनीं हूं। इस क्षेत्र ने मुझे बहुत प्यार, सहयोग और तारीफ़ें दी हैं लेकिन ये मुझे गुमराही के रास्ते पर भी ले आया है। मैं ख़ामोशी से और अनजाने में अपने ईमान से बाहर निकल आई।

विज्ञापन

3 of 10
जायरा वसीम - फोटो : Twitter

मैंने ऐसे माहौल में काम करना जारी रखा जिसने लगातार मेरे ईमान में दख़लअंदाजी की। मेरे धर्म के साथ मेरा रिश्ता खतरे में आ गया। मैं नजरअंदाज करके आगे बढ़ती रही और अपने आप को आश्वस्त करती रही कि जो मैं कर रही हूं सही है और इससे मुझ पर फर्क नहीं पड़ रहा है। मैंने अपने जीवन से सारी बरकतें खो दीं। बरकत ऐसा शब्द है जिसके मायने सिर्फ खुशी या आशीर्वाद तक ही सीमित नहीं है बल्कि ये स्थिरता के विचार पर भी केंद्रित है और मैं इसे लेकर संघर्ष करती रही हूं।


4 of 10
zaira wasim

मैं लगातार संघर्ष कर रही थी कि मेरी आत्मा मेरे विचारों और स्वभाविक समझ से मिलाप कर ले और मैं अपने ईमान की स्थिर तस्वीर बना लूं लेकिन मैं इसमें बुरी तरह नाकाम रही। कोई एक बार नहीं बल्कि सैकड़ों बार। अपने फैसले को मजबूत करने के लिए मैंने जितनी भी कोशिशें कीं, मैं वही बनी रही जो मैं हूं और हमेशा अपने आप से ये कहती कि जल्द ही मैं बदल जाऊंगी। मैं लगातार टालती रही और मैं अपनी आत्मा को इस विचार में फंसाती रही और छलती रही कि मैं जानती हूं मैं जो कर रही हूं वो सही नहीं लग रहा लेकिन एक दिन जब सही समय आएगा तो मैं इस पर रोक लगा दूंगी।

विज्ञापन

5 of 10
zaira wasim

ऐसा करके मैं लगातार खुद को कमज़ोर स्थिति में रखती, जहां मेरी शांति, मेरे ईमान और अल्लाह के साथ मेरे रिश्ते को नुक़सान पहुंचाने वाले माहौल का शिकार बनना आसान था। मैं चीजों को देखती रही और अपनी धारणाओं को ऐसे मोड़ती रही जैसे मैं चाहती थी, बिना ये समझे कि मूल बात ये है कि उन्हें ऐसे ही देखा जाए जैसी की वो हैं। मैं बचकर भागने की कोशिशें करती और आखिरकार बंद रास्ते पर पहुंच जाती। इस अंतहीन सिलसिले में कुछ था जो मैं खो रही थी और जो लगातार मुझे प्रताड़ित कर रहा था, जिसे न मैं समझ पा रही थी और न ही संतुष्ट हो पा रही थी।जब तक मैंने अपने दिल को अल्लाह के शब्दों से जोड़कर अपनी कमजोरियों से लड़ने और अपनी अज्ञानता को सही करने का फैसला नहीं किया।

विज्ञापन

6 of 10
zaira wasim - फोटो : instagram

कुरान के महान और आलौकिक ज्ञान में मुझे शांति और संतोष मिला। वास्तव में दिल को सुकून तब ही मिलता है जब इंसान अपने खालिक के बारे में, उसके गुणों, उसकी दया और उसके आदेशों के बारे में जानता है। मैंने अपनी स्वयं की आस्तिकता को महत्व देने के बजाय अपनी सहायता और मार्गदर्शन के लिए अल्लाह की दया पर और अधिक भरोसा करना शुरू कर किया। कुरान के महान और आलौकिक ज्ञान में मुझे शांति और संतोष मिला। वास्तव में दिल को सुकून तब ही मिलता है जब इंसान अपने खालिक के बारे में, उसके गुणों, उसकी दया और उसके आदेशों के बारे में जानता है। मैंने अपनी स्वयं की आस्तिकता को महत्व देने के बजाय अपनी सहायता और मार्गदर्शन के लिए अल्लाह की दया पर और अधिक भरोसा करना शुरू कर किया।

विज्ञापन

7 of 10
Zaira Wasim - फोटो : twitter

मेरा दिल शक और गलती करने की जिस बीमारी से पीड़ित था उसे मैंने पहचान लिया था। हमारे दिल पर दो बीमारियां हमला करती हैं। संदेह और त्रुटि और दूसरी हवस और इच्छाएं। इन दोनों का ही कुरान में ज़िक्र है। अल्लाह कहता है, "उनके दिलों में एक बीमारी है (संदेह और पाखंड) की जिसे मैंने और ज़्यादा बढ़ा दिया है।" मुझे अहसास हुआ कि इसका इलाज सिर्फ अल्लाह की शरण में जाने से ही होगा और वास्तव में जब मैं रास्ता भटक गई थी तब अल्लाह ही ने मुझे हार दिखाई।

8 of 10
zaira wasim

कुरान और पैगंबर का मार्गदर्शन मेरे फैसले लेने और तर्क करने की वजह बना और इसने ज़िंदगी के प्रति मेरे नजरिए और ज़िंदगी के मायने को बदल दिया। हमारी इच्छाएं हमारी नैतिकता का प्रतिबिंब हैं। हमारे मूल्य हमारी आंतरिक पवित्रता का बाहरी रूप हैं। इसी तरह कुरान और सुन्नत के साथ हमारा रिश्ता, अल्लाह और धर्म के साथ हमारे रिश्ते और हमारी इच्छाओं, मकसद और ज़िंदगी के मायने को परिभाषित करता है। मैंने कामयाबी को लेकर अपने विचार, अपनी जिंदगी के मायने और मकसद के गहरे स्रोतों को लेकर सावधानीपूर्वक सवाल किया। सोर्स कोड जिसने मेरी धारणाओं को प्रभावित किया, वो अलग आयामों में विकसित हुआ।

9 of 10
जायरा वसीम
कामयाबी का हमारे पक्षपाती, भ्रमित, पारंपरिक और खोखले जीवन मूल्यों से सह-संबंध नहीं है। हमें क्यों बनाया गया इसके मक़सद को समझ लेना ही कामयाबी है। हम अपनी आत्मा को धोखा देकर गुमराही में आगे बढ़ते रहते हैं और ये भूल जाते हैं कि हमें क्यों बनाया गया है। ये यात्रा थकाऊ रही है, लंबे समय से मैं अपनी रूह से लड़ती रही हूं। ज़िंदगी बहुत छोटी है लेकिन अपने आप से लड़ते रहने के लिए बहुत लंबी भी है।
विज्ञापन

10 of 10
जायरा वसीम

इसलिए आज मैं अपने इस फ़ैसले पर पहुंची और मैं अधिकारिक तौर पर इस क्षेत्र से अलग होने की घोषणा करती हूं। यात्रा की कामयाबी आपके पहले कदम पर निर्भर है। मेरे सार्वजनिक तौर पर ऐसा करने का कारण अपनी पवित्र छवि निर्माण करना नहीं है बल्कि मैं एक नई शुरूआत करना चाहती हूं और उसके लिए कम से कम मैं ये कर सकती हूं। अपनी इच्छाओं के सामने समर्पण मत करो क्योंकि इच्छाएं अनंत हैं और हमेशा उससे बाहर निकलो जो आपने हासिल किया है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें