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South vs Bollywood: साउथ की छोटे बजट की फिल्मों के आगे क्यों टिक नहीं पाईं आमिर-अक्षय की मूवीज? यहां समझिए

Mon, 22 Aug 2022 07:31 PM IST
शशि सिंह एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

मौजूदा समय में बॉलीवुड की फिल्में साउथ के आगे दम तोड़ती नजर आ रही हैं। हालांकि पहले यह टक्कर बड़े बजट की फिल्मों में थी लेकिन आमिर खान की 'लाल सिंह चड्ढा' और अक्षय कुमार की 'रक्षा बंधन' छोटे बजट की दक्षिण भारतीय फिल्मों के आगे भी घुटने टेकती नजर आ रही हैं।
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कार्तिकेय 2, बिम्बिसार, लाल सिंह चड्ढा, रक्षा बंधन - फोटो : social media
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विस्तार
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बॉलीवुड हो चाहे साउथ की कोई फिल्म...हिट होगी या फ्लॉप ये सिर्फ और सिर्फ दर्शक ही तय करते हैं। इसलिए देखने में आता है कि कई बड़े बजट की फिल्में जहां धड़ाम हो जाती हैं, वहीं कम लागत लगाकर बनाई गईं फिल्में भी अच्छी कमाई कर ले जाती हैं। ऐसा ही कुछ हाल ही में रिलीज हुई फिल्मों को देखकर भी लग रहा है, हालांकि इस बार भी साउथ और बॉलीवुड की टक्कर होती दिखाई दे रही है। इस समय आमिर खान की लाल सिंह चड्ढा और अक्षय कुमार की रक्षा बंधन सिनेमाघरों में हैं। दोनों ही फिल्म सुपरस्टार्स की हैं और मेगा बजट में बनाई गई हैं। जबकि इन्हीं के आस-पास रिलीज हुई साउथ की फिल्में जैसे 'सीता रामम', 'कार्तिकेय 2' और 'बिम्बिसार' काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। हालांकि आमिर और अक्षय दोनों की फिल्मों के मुकाबले इनका बजट काफी कम है। तो आखिर क्या वजह है कि साउथ की छोटे बजट की फिल्मों के आगे आमिर-अक्षय की मेगा बजट मूवीज नहीं टिक पा रही हैं? चलिए समझते हैं। 

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बायकॉट के ट्रेंड से हुआ नुकसान
इस समय बॉलीवुड को लेकर जो समीकरण बने हुए हैं उसमें कोई दो राय नहीं है कि इससे आमिर की लाल सिंह चड्ढा और अक्षय की रक्षाबंधन को काफी नुकसान हुआ है। भले ही सोशल मीडिया पर सिर्फ लाल सिंह चड्ढा का बायकॉट किया गया हो लेकिन बॉलीवुड बायकॉट के ट्रेंड ने अक्षय की फिल्म को भी प्रभावित किया। जबकि कुछ समय से देखने में आ रहा है कि साउथ को लेकर लोगों में क्रेज बढ़ा है। कुछ समय पहले पुष्पा, आरआरआर जैसी कई बड़े बजट की साउथ फिल्में सुपरहिट साबित हुई हैं और इसके बाद से हिंदी पट्टी के दर्शकों का ध्यान छोटे बजट की दक्षिण भारतीय फिल्मों की और भी जाने लगा है। जिसका फायदा अभिनेता निखिल सिद्धार्थ की फिल्म 'कार्तिकेय 2' और नंदमुरी कल्याण राम की फिल्म 'बिम्बिसार' को मिलता दिखाई दे रहा है। वहीं 'सीता रामम' को मृणाल ठाकुर की छवि का भी कुछ फायदा होता दिखा।

ऐतिहासिक व सच्ची घटनाओं की कहानियां कर रहीं ध्यान आकर्षित
मौजूदा समय में देखने में आया है कि दर्शकों का रुझान ऐसी कहानियों की ओर बढ़ा है जो ओरिजिनल आइडिया हो या फिर इतिहास आदि की पृष्ठभूमि पर बनी हो (अलबत्ता इनका कंटेंट और स्टारकास्ट अच्छी होनी चाहिए)। लाल सिंह चड्ढा की बात करें तो यह सुपरहिट हॉलीवुड फिल्म 'फॉरेस्ट गंप' का रीमेक है, लेकिन प्रतीत होता है कि दर्शक इसके देसी वर्जन को नहीं पचा पाए, क्योंकि कई ऐसे लोग हैं जो ओरिजिनल कहानी देख चुके हैं और वह उसमें आमिर व करीना को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। जबकि बात करें रक्षा बंधन की तो अक्षय की पिछली फिल्मों का हाल देखते हुए उनकी ब्रांडिंग पर काफी असर पड़ा है। इधर 'बिम्बिसार' फिल्म की कहानी को मगध के राजा बिम्बिसार के बारे में बुना गया है जबकि सीता रामम भी युद्ध की पृष्ठभूमि के साथ एक प्यारी प्रेम कहानी को दिखाती है।
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छवि भी रखती है मायने
इस समय अगर बॉलीवुड की फिल्मों को लेकर बायकॉट का ट्रेंड देखा जाए तो लोग ज्यादातर स्टार्स के पुराने बयान या फिर उनकी कुछ पर्टिकुलर फिल्मों आदि को लेकर ट्रोल करते नजर आ रहे हैं। जैसे इस समय आमिर के पुराने बयानों के साथ ही उनकी फिल्म पीके में भगवान की छवि को धूमिल करने को लेकर काफी गहमागहमी का माहौल है तो वहीं अक्षय की भी इसी तरह से पहली फिल्मों का लोग हवाला दे रहे हैं। जबकि साउथ की फिल्मों में भगवान के प्रति खूब आस्था और सम्मान देखने को मिल रहा है। यह ट्रेंड बाहुबली से लेकर आरआरआर और अब कार्तिकेय 2 (भले ही यह धर्म के प्रति कई मिथ्याओं को तोड़ती है) में भी देखने को मिला।
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