"डैडी बहुत शांत स्वभाव के थे। सभी से उनके अच्छे रिश्ते थे। डैडी अपने दौर के गायकों में सबसे कम उम्र थे। अतः सभी से छोटे भाई जैसा प्यार मिलता था...अपने पिता महेंद्र कपूर साहब के कारण मुझे हिंदी सिने-संगीत के सुनहरे दौर की हस्तियों को नजदीक से देखने-जानने का मौका मिला। यूं तो डैडी के किशोर दा, मुकेश जी, लता जी और अन्य हस्तियों से खास संबंध थे, मगर मोहम्मद रफी साहब के साथ गुरु-शिष्य का नाता था।
डैडी सिर्फ 12 साल के थे तभी से वे रफी साहब के साथ थे। तब दोनों स्कूल में थे। जब तक डैडी ने मेट्रो मर्फी प्रतियोगिता जीती, तब तक रफी साहब इंडस्ट्री में बड़े गायक बन चुके थे। उन्होंने डैडी से कहा था, ‘महेंदर हम दोनों साथ में गाने नहीं गाएंगे, क्योंकि हमारी आवाजें मिलती हैं।’ दोनों इस पर कायम रहे, सिवाय फिल्म आदमी (1968) के ‘कैसी हसीन आज बहारों की रात है’ गाने के। इस गाने में तलत महमूद साहब की आवाज को डैडी ने संगीतकार नौशाद साहब के कहने पर डब किया था। यह उस दौर की बड़ी कंट्रोवर्सी है, जिसकी हकीकत मैं आने वाले दिनों में अपने यू-ट्यूब प्रोग्राम ‘रूहानी किस्से विद रोहन कपूर’ में सामने लाऊंगा। उस दौर की यादों को मैं इन दिनों इस प्रोग्राम में संजो रहा हूं।