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Bengal Election 2021: कभी वामपंथ का झंडा उठाकर TMC में पाई थी जगह, अब भाजपा के साथ करेंगे नए सफर की शुरुआत

Sun, 07 Mar 2021 01:13 PM IST
स्वाति सिंह एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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मिथुन चक्रवर्ती - फोटो : सोशल मीडिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के चुनावी अभियान को धार देने के लिए रविवार यानी सात मार्च को कोलकाता में रैली की। शहर के ब्रिगेड परेड मैदान में हुई इस रैली में बंगाल से जुड़े पार्टी के कई सीनियर नेता मौजूद रहे। इसके साथ ही पीएम मोदी की उपस्थिति में वह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हुए। मालूम हो कि मिथुन के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें तभी लगाई जाने लगी थीं जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने उनसे मुलाकात की थी।
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मिथुन चक्रवर्ती - फोटो : सोशल मीडिया
फिल्मी दुनिया में अपने अभिनय से धाक जमाने वाले मिथुन चक्रवर्ती का राजनीति का सफर ज्यादा अच्छा खास नहीं रहा है। साल 2011 में जब टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने बंगाल की सत्ता संभाली तो उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती को राजनीति से जुड़ने का न्योता दिया था। उस वक्त मिथुन ने स्वीकार किया।

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मिथुन चक्रवर्ती, मोहन भागवत - फोटो : फाइल
तृणमूल कांग्रेस ने मिथुन चक्रवर्ती को राज्यसभा से सांसद भी बनाया। लेकिन फिर साल 2016 के आखिर में मिथुन ने राज्यसभा के सांसद पद से इस्तीफा दे दिया और राजनीति से संन्यास ले लिया। उस वक्त मिथुन ने अपनी सेहत का हवाला देकर राजनीति छोड़ी थी। कहा जाता है कि राजनीति छोड़ने से लगभग एक साल पहले से ही उन्होंने खुद को अलग करना शुरू कर दिया था। दरअसल मिथुन चक्रवर्ती की राजनीति छोड़ने की शुरुआत उसी वक्त से हो गई थी जब उनका नाम शारदा चिटफंड घोटाले में आया था।

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मिथुन चक्रवर्ती - फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल, मिथुन चक्रवर्ती शारदा कंपनी में ब्रांड एंबेसडर थे। इसके चलते प्रवर्तन निदेशालय ने मिथुन चक्रवर्ती से पूछताछ भी की थी। इसके कुछ दिन बाद ही मिथुन चक्रवर्ती ने लगभग एक करोड़ बीस लाख रुपये यह कहकर लौटा दिए थे कि वो किसी के साथ फर्जीवाड़ा नहीं करना चाहते। इसके बाद से ही मिथुन ने राजनीति से संन्यास ले लिया था। आखिरी एक साल में वो राज्यसभा में भी बहुत कम ही नजर आते थे।
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मिथुन चक्रवर्ती - फोटो : सोशल मीडिया
वहीं, अगर मिथुन चक्रवर्ती के राजनीतिक करियर को देखा जाए तो वह शुरू से ही वामपंथ से जुड़े हुए थे। उन्होंने कई बार खुद को वामपंथी भी बताया है। वह पश्चिम बंगाल में खेल मंत्री और वरिष्ठ वामपंथी नेता सुभाष चक्रवर्ती के काफी करीबी भी माने जाते थे। ऐसे में जब ममता बनर्जी के आमंत्रण पर मिथुन ने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा तो कई हैरान हुए। लेकिन फिर उनके बीजेपी में जाने के कयास से कहा जाने लगा है कि राजनीति में कहीं भी, कुछ भी हो सकता है।
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