विष्णु पुराण
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दरअसल हिरण्यकश्यपु के राज में जो भी भगवान विष्णु की पूजा करता था उसको दंड दिया जाता था। हिरण्यकशिपु ने अपने ही पुत्र प्रह्लाद को मारने का बहुत प्रयास किया लेकिन कहते हैं न जीवन और मृत्यु ऊपरवाले के हाथ होती है, जिसकी रक्षा के लिए स्वयं भगवान को अवतार लेना पड़ा उसको मारना इतना आसान नहीं था।