विनोद पांडे
- फोटो : साभार विनोद पांडे
और, फिर इसके बाद आपने बनाई हिंदी सिनेमा की ट्रेंडसेटर फिल्म ‘ये नजदीकियां’ शबाना आजमी, परवीन बॉबी और मार्क जुबैर के साथ, शुरुआत शबाना से करते हैं?
'ये नजदीकियां' का मूल विचार मुझे शबाना ने ही दिया। उन्होंने मुझे एक बार स्टूडियो में बुलाया। वह शायद रंजीत स्टूडियो था। मेकअप रूम में उन्होंने मुझे एक फ्रेंच फिल्म का एक लाइन का नैरेशन दिया। मैंने शबाना से इतना ही कहा कि अब इसके ऊपर मैं अपनी पटकथा लिखूंगा और हम कभी अब इस फिल्म का जिक्र भी आपसी बातचीत में नहीं करेंगे। मैंने फिल्म देखी भी नहीं। उसके बाद मैं लंदन चला गया वापस। शबाना को पता चला तो उसे लगा कि अब लंदन जाकर भला क्यों कोई डायरेक्टर लौटेगा। उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी इस कहानी की। लेकिन, मैं कुछ महीनों बाद लौटा तो सीधे उन्हें जाकर एक मोटी सी फाइल थमा दी, जो फिल्म की स्क्रिप्ट थी। एक महीने बाद मुझे बुलावा आया। मैं गया तो बड़ी संजीदगी के साथ शबाना जी मुझे देखती हैं, और कहती हैं, 'मिस्टर पांडे मैं आपकी फिल्म एक ही शर्त पर करूंगी कि आपकी फिल्म के तीनों किरदार मैं ही करूंगी।’ इतनी पसंद आई उन्हें ये फिल्म।