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हार से बौखलाई कांग्रेस ने इस एक्टर को भेज दिया था जेल, इमरजेंसी में 3 नाटक हो गए थे बैन

Sun, 19 Aug 2018 09:57 AM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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उत्पल दत्त
एक्टर, डायरेक्टर और पॉलिटिकल एक्टिविस्ट उत्पल दत्त ने सभी किरदार को परदे पर इतनी बखूबी से निभाया कि आज भी वो जीवंत लगते हैं। 'सात हिंदुस्तानी' में बने रेलवे अफसर हों या 'गोलमाल' में भवानी शंकर का किरदार, लोग उन्हें आज भी याद करते हैं। आज उनकी डेथ एनिवर्सिरी पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ बातें।
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उत्पल दत्त
उत्पल दत्त शुरू से ही साहित्य और पढ़ने-लिखने के शौकीन थे। उनका जन्म बंटवारे से पहले बांग्लादेश के बारिसल में हुआ था, जिसके बाद उनके पिता गिरिजारंजन दत्त ने पढ़ाई के लिए कोलकाता भेजा। साल 1940 में वो अंग्रेजी थियेटर से जुड़े और यहीं से उत्पल दत्त का एक्टिंग करियर शुरू हुआ। 
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उत्पल दत्त
नाटकों में अभिनय के साथ उत्पल दत्त ने निर्देशन और लेखन का काम भी शुरू कर दिया। उत्पल दत्त अंग्रेजी के साथ बंगाली नाटकों में भी काम करते थे। बाद में उन्होंने खुद की थियेटर कंपनी खोल ली और तय किया कि नाटकों से वो सरकार और राजनीति पर वार करेंगे।

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उत्पल दत्त
साल 1950 में उन्होंने फिल्म 'माइकल मधुसूदन' में मुख्य भूमिका निभाई। बढ़ती सफलता के बाद उत्पल दत्त ने सत्यजीत रे की फिल्मों को साथ ही 'गुड्डी', 'गोलमाल', 'नरम-गरम', 'रंग बिरंगी' और 'शौकीन' जैसी कई यादगाार हिंदी फिल्मों में काम किया।
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उत्पल दत्त
उत्पल दत्त एक बड़े मार्क्सवादी भी थे। वह अक्सर वामपंथी दलों के लिए क्रांतिकारी नाटक करते थे। उनके एक नाटक 'कल्लोल' को लेकर जबरदस्त विवाद हुआ था। उस नाटक में 1946 में नौसैनिकों की बगावत की कहानी में तब की कांग्रेसी सरकार पर निशाना साधा गया था। 1965 में कांग्रेस सरकार ने नाराज होकर उत्पल दत्त को बिना किसी मुकदमे के जेल में डाल दिया था। 
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उत्पल दत्त
1967 में जब बंगाल विधानसभा के चुनाव हुए तो कांग्रेस सरकार बुरी तरह हारी और वाम दलों के गठबंधन को सरकार बनाने का पहला मौका मिला। इस हार के कारणों में 'कल्लोल' और उत्पल दत्त की गिरफ्तारी को एक बड़ा कारण माना जाता है। जब देश में इमरजेंसी लगा तो उत्पल दत्त ने तीन नाटक लिखे थे- बैरीकेड, सिटी ऑफ नाइटमेयर्स, इंटर द किंग। उस वक्त सरकार ने उनके तीनों नाटकों को बैन कर दिया था।
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फाइल फोटो - फोटो : storypick
उत्पल दत्त ने 100 से ज्यादा फिल्में की हैं। उन्हें डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्में गोलमाल, नरम गरम और रंग बिरंगी के लिए कॉमेडी का फिल्मफेयर मिला। गोलमाल के भुवन शोम के लिए तो उन्हें नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया। 19 अगस्त 1993 को उत्पल दत्त इस दुनिया को अलविदा कह गए। 
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