zohra sehgal
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शादी पर होते होते बचा दंगा
जोहरा और कमलेश्वर की शादी तमाम लोगों को रास न आई। घर वालों ने बहुत मुखालिफत की, हालात दंगे जैसे तक बन आए। लेकिन, बाद में सब मान गए, लेकिन सिर्फ तब तक, जब तक कि फिर से हिंदुस्तान के बंटवारे की आग इनकी चौखट तक हिंदू-मुसलमान का झगड़ा न ले आई। दोनों ने अल्मोड़ा में जो सीखा और सिखाया था, उसे लेकर दोनों ने लाहौर में डांस इंस्टीट्यूट खोल लिया था पर अब लग रहा था कि इंस्टीट्यूट चलाना तो दूर, लाहौर में जिंदा बचना मुश्किल हो जाएगा। साल भर की बच्ची किरन को लेकर दोनों बंबई भाग आए, जहां जोहरा की बहन उजरा पृथ्वी थिएटर की नामी हीरोइन थी।
पृथ्वी थिएटर से की शुरूआत
जोहरा सहगल ने साल 1945 में 400 रुपये महीने की सेलरी पर पृथ्वी थिएटर ज्वाइन किया और अगले 14 साल पूरे हिंदुस्तान का शहर शहर छान मारा, नाटक करते करते। पृथ्वी थिएटर के अलावा जोहरा इप्टा की भी सक्रिय सदस्य रहीं। इप्टा ने जब ख्वाजा अहमद अब्बास के निर्देशन में अपनी पहली फिल्म बनाई, धरती के लाल तो वह इसकी भी हीरोइन बनीं। इप्टा की वजह से ही जोहरा को चेतन आनंद की नीचा नगर में भी काम मिला। कान फिल्म फेस्टिवल का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार पाल्मे डी ओर जीतने वाली ये पहली भारतीय फिल्म है। इसके बाद से लेकर ऋषि कपूर के बेटे रणबीर कपूर की पहली फिल्म सांवरिया तक जोहरा सहगल लगातार दर्शकों के चेहरों पर अपनी खास अदाओं से मुस्कुराहट लाती रहीं।