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लाहौर में जन्मे ओपी नैयर लता-रफी को मानते थे दुश्मन, ऐसे बने बॉलीवुड के सबसे महंगे संगीतकार

Wed, 16 Jan 2019 10:24 AM IST
anand anand एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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OP Nayyar - फोटो : social media
बेजोड संगीतकार और बॉलीवुड के फ्यूजन किंग ओपी नैयर का नाम आज भी हिंदुस्तान के हर घर में लिया जाता है। ओपी नैय्यर को संगीत की वजह से नहीं उनकी शख्सियत की वजह से भी सबसे अलहदा संगीतकारों में शुमार किया जाता है। 16 जनवरी 1926 को लाहौर में जन्में ओपी नैयर के कंपोज किए हुए गाने देश में ही नहीं विदेश में भी पसंद किए जाते हैं। ओपी नैयर का पूरा नाम ओंकार प्रसाद नैयर है। नैयर के बारे में कहा जाता है, वह संगीत और जिंदगी दोनों को अपनी शर्तों पर जीते थे। अक्खड़पन और सादगी ओपी नैयर की पहचान थी।
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op nayyar - फोटो : social media
ओपी नैय्यर काफी विद्रोही स्वभाव के थे। दरअसल इसके पीछे एक कहानी है। ओपी के पिता काफी अनुशासित व्यक्ति थे। बचपन में ओपी नैयर ने पिता जी से इतनी मार खाई कि वह स्वभाव से विद्रोही बन गए। एक बार तो ओपी ने अपने विद्रोही स्वभाव की वजह से अपना घर छोड़ दिया था। ओपी नैयर के करियर की शुरुआत 1952 में हुई। नैयर को उनके पहले गाने के लिए 12 रुपए मिले। नैयर ने इसके बाद एक-एक कर हिट गाने देना शुरू किया। उनके गानों को लोग इस कदर पसंद करने लगे कि वह फिल्म में म्यूजिक देने के लिए 1 लाख रुपए तक चार्ज करने लगे। 
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op nayyar - फोटो : social media
वहीं इस दौर में वह सबसे ज्यादा पैसे लेने वाले संगीतकार बन गए थे। इस बीच ओपी नैयर और गुरु दत्त की दोस्ती होती है। भारतीय फिल्म संगीत के चाहने वालों के बीच ओपी नैय्यर ऐसे म्यूज़िक डायरेक्टर के तौर पर याद किए जाते हैं, जिन्हें लोकप्रिय संगीत रचने में महारत हासिल थी। ओपी नैय्यर ने 50 और 60 के दशक में इतने कामयाब गीत कंपोज़ किए है कि उन्हें किसी लिस्ट में समेटना मुमकिन नहीं है…उनके गाने उड़े जब-जब ज़ु्ल्फें तेरी, ये देश है वीर जवानों का, लेके पहला पहला प्यार, बाबूजी धीरे चलना आज भी लोगों के दिलों मे बसते हैं।

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OP Nayyar - फोटो : social media
ओपी नैयर का विवादों से भी खासा नाता रहा है। लता मंगेशकर के साथ उनके विवाद के किस्से काफी मशहूर हैं। दरअसल ओपी नैयर ने तय किया की वह कभी भी लता मंगेशकर के साथ काम नहीं करेंगे। ओपी नैयर ने हमेशा कहा कि लता जी की आवाज में पाकीजगी थी। उन्हें शोखी की जरूरत थी, जो आशा भोसले या शमशाद बेगम की आवाज में ज्यादा थी। ओपी नैयर ने इस दौर में बड़े दुश्मन बनाए। मोहम्मद रफी से भी उनकी अनबन हुई। दरअसल नैयर हर काम समय पर करना पसंद करते थे, एक दिन नैय्यर को एक गाना रफी के साथ रिकॉर्ड करना था। 
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op nayyar with asha bhosle - फोटो : file photo
नैयर रफी साहब का इंतजार कर रहे होते हैं लेकिन रफी साहब समय से एक घंटा लेट पहुंचते हैं। नैयर इस बात को लेकर रफी से काफी झगड़ा करते हैं। दोनों की यह लड़ाई लगभग तीन साल तक चलती है। एक दिन रफी साहब अचानक नैयर के घर पहुंच जाते हैं। नैयर रफी को उनके घर पर देखकर भावुक होकर गले लगा लेते हैं और दोनों फिर से साथ हो जाते हैं। 28 जनवरी 2007 को ओपी नैयर दुनिया से रुखसत हो गए, लेकिन बीच के इन करीब 81 साल में उन्होंने जो किया, उसे संगीत जगत हमेशा याद रखेगा।
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