फिल्मों की पायरेसी रोकने के लिए मोदी सरकार ने सिनेमेटोग्राफी एक्ट 1952 में बदलाव को मंजूरी दे दी है। इस बदलाव के बाद अगर कोई भी व्यक्ति सिनेमाघरों में फिल्मों को रिकॉर्ड करता पकड़ा गया तो उस पर 10 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा आरोपी को तीन साल तक की जेल भी हो सकती है।