शरत कटारिया
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
आपकी फिल्मों के किरदार दर्शकों को अपने पड़ोस के ही लगते हैं, ऐसे किरदारों का चुनाव कैसे करते हैं आप?
दिल्ली का रहने वाला हूं और दिल्ली वालें चीजों को देखकर बड़ी जल्दी समझ जाते हैं। मेरी परवरिश जिस माहौल में हुई और जिस माहौल में मुझे जिंदगी जीने का मौका मिला, मेरी सोच इन किरदारों को लेकर वैसी ही शुरू से विकसित होती रही है। प्रेम हो, संध्या हो या फिर मौजी और ममता। इनके रिश्तेदारों के चरित्र भी मैं अपने रिश्तेदारों या जानने वालों में ही तलाश लेता रहा हूं। मेरे सिनेमा में मेरी दिल्ली झलकती है।