amitabh bachchan
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क्या है सच्चाई
सबसे पहले बात करते हैं अमिताभ बच्चन के वीडियो पोस्ट की। अमिताभ ने अपने वीडियो पोस्ट के कैप्शन में 'लैंसेट' की एक स्टडी का हवाला दिया है। लैंसेट की जिस स्टडी की बात अमिताभ बच्चन कर रहे हैं, उसका नाम है - Prolonged presence of SARS-CoV-2 viral RNA in faecal samples. इस स्टडी में बताया गया है कि स्टडी के लिए कोरोना वायरस संक्रमित 74 लोगों के मल और श्वास के सैंपल जमा किए गए। इन 74 मरीजों में से 33 मरीजों के मल सैंपल कोरोना से निगेटिव पाए गए। वहीं श्वास सैंपल पर इनका असर करीब 15 दिनों तक देखा गया।
इसके अलावा 74 कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों में से 41 मरीजों के मल सैंपल पॉजिटिव पाए गए। वहीं गौर करने वाली बात है कि मल सैंपल में कोरोना वायरस करीब 28 दिनों तक पॉजिटिव पाया गया। इसके साथ ही दूसरी ओर इन 41 मरीजों के श्वास सैंपल में कोरोना वायरस करीब 17 दिनों तक देखा गया। याद दिला दें कि जिन 33 मरीजों के मल सैंपल में कोरोना वायरस पॉजिटिव नहीं था, उनके श्वास में 17 नहीं बल्कि 15 दिन तक ही कोरोना पाया गया था।