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यश चोपड़ा की 10 यादगार फिल्में, जो देख याद आ जाएंगे एक बार फिर 'किंग ऑफ रोमांस'

Sat, 27 Jun 2020 03:01 AM IST
प्रतीक्षा राणावत एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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यश चोपड़ा की बेहतरीन फिल्में - फोटो : Social Media
बॉलीवुड को रोमांस की एक अलग परिभाषा सिखाने वाले निर्देशक यश चोपड़ा ही थे। यश चोपड़ा हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक रहे। यश ने 1959 से अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने सबसे पहले फिल्म 'धूल का फूल' बनाई। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। यश चोपड़ा ने बॉलीवुड को एक से बढ़कर एक फिल्में दी हैं। उनमें से उनकी कुछ यादगार फिल्मों के बारे में आज आपको इस पैकेज में बताएंगे।
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waqt
वक्त (1965)
60 के दशक में जब फिल्मों में अमूमन एक हीरो और एक हीरोइन होती थी। इस दौर में वो एक ऐसी फिल्म लेकर आए जिसमें एक, दो नहीं बल्कि कई सितारे थे। 'वक्त' हिंदी सिनेमा की पहली मल्टी स्टारर फिल्म थी, जो लॉस्ट एंड फाउंड फॉर्मूले पर आधारित थी। ये फॉर्मूला कुछ ऐसा हिट हुआ कि अगले तीस सालों तक बॉलीवुड में ऐसी फिल्मों की भरमार हो गई।
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इत्तेफाक (1969) - फोटो : सोशल मीडिया
इत्तेफाक (1969)
'वक्त' की कामयाबी के बाद ऐसा नहीं हुआ कि यश चोपड़ा ने इसी तर्ज पर फिल्में बनानी शुरू कर दीं। 'इत्तेफाक' बिलकुल अलग तरह की फिल्म थी, जिसे बनाकर यश चोपड़ा ने दर्शकों को चौंका दिया था। ये फिल्म सिर्फ एक रात की कहानी थी, जिसमें एक भी गाना नहीं था।

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film daag - फोटो : social media
दाग (1972)
ये फिल्म यशराज बैनर तले बनने वाली पहली फिल्म थी। इससे पहले यश चोपड़ा अपने बड़े भाई बी आर चोपड़ा के बैनर तले फिल्में निर्देशित करते थे। दाग, हालांकि अंग्रेजी फिल्म 'सनफ्लॉवर' से प्रेरित थी लेकिन उसे समकालीन बनाने के लिए उन्होंने इसकी कहानी को गुलशन नंदा से लिखवाया। समय से आगे की ये फिल्म थी, जिसमें एक शख्स की पत्नी गायब हो जाती है, तो वो बिना शादी किए एक दूसरी महिला के साथ रहने लगता है।
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Deewar - फोटो : Mumbai, Amar Ujala
दीवार (1975)
ये फिल्म अमिताभ बच्चन के करियर को एक नए मुकाम पर ले गई। दो भाइयों की कहानी, एक कानून का रखवाला और दूसरा कानून का मुजरिम, इस कहानी को यश चोपड़ा ने बेहतरीन तरीके से परदे पर पेश किया। सलीम जावेद की स्क्रिप्ट और संवाद, जैसे- मेरे पास मां है, तो भारतीय सिनेमा के इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं।
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trishul - फोटो : amar ujala mumbai
त्रिशूल (1978)
संजीव कुमार, अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की मुख्य भूमिका वाली ये फिल्म एक 'नाजायज बेटे' के अपने पिता से बदला लेने की कहानी है। एक बार फिर मजबूत कथानक, बेहतरीन अभिनय और यश चोपड़ा के कसे हुए निर्देशन ने ऐसा जादू चलाया कि फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई और यश चोपड़ा का नाम हिंदी सिनेमा के अग्रणी नामों में शुमार हो गया।
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सिलसिला (1981) - फोटो : सोशल मीडिया
सिलसिला (1981)
अमिताभ बच्चन, रेखा और जया बच्चन की मुख्य भूमिका वाली ये फिल्म अपनी कास्टिंग की वजह से सबसे ज्यादा चर्चा में रही। रेखा, जया और अमिताभ को एक फिल्म में लाने का मुश्किल काम यश चोपड़ा ने अंजाम दिया। ये फिल्म व्यवसायिक तौर पर ज्यादा नहीं चली लेकिन इसके गीत बड़े लोकप्रिय साबित हुए।

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chandani
चांदनी (1989)
एक बार फिर यश चोपड़ा रोमांस की तरफ लौटे और नाच-गाने से भरपूर फिल्म बनाई चांदनी। श्रीदेवी, ऋषि कपूर की मुख्य भूमिका वाली ये फिल्म जबरदस्त कामयाब रही। यश चोपड़ा ने खूबसूरत लोकेशंस को बखूबी परदे पर उतारा और फिल्म ने दर्शकों को सुखद अहसास दिया।

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LAMHE - फोटो : BBC
लम्हे (1991)
यश चोपड़ा ने ये फिल्म बेहद जोखिम मोल लेकर बनाई गई थी। ये फिल्म अपने वक्त से बेहद आगे की फिल्म थी। जिसमें एक लड़की को अपनी मां के प्रेमी से प्यार हो जाता है। इस तरह की कहानी इससे पहले हिंदी सिनेमा के परदे पर कभी नहीं आई थी। फिल्म में अनिल कपूर और श्रीदेवी का जबरदस्त अभिनय था।

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darr
डर (1993)
यश चोपड़ा की ये फिल्म एक तरह से ट्रेंडसेटर साबित हुई। जैसे दीवार ने अमिताभ बच्चन के करियर में पंख लगा दिए थे, वैसे ही डर ने शाहरुख खान के करियर को नई बुलंदियों पर पहुंचा दिया। फिल्म की कहानी हीरो नहीं बल्कि एक विलेन के हीरोइन से एकतरफा प्रेम के इर्द गिर्द बुनी गई थी। शाहरुख खान का निभाया ये खलनायक का पात्र काफी लोकप्रिय साबित हुआ और फिल्म सुपरहिट रही।
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dil toh pagal hai - फोटो : file photo
दिल तो पागल है (1997)
शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर जैसे सितारों को लेकर 65 साल के यश चोपड़ा ने ये बेहद युवा फिल्म बनाई और नई पीढ़ी के निर्देशकों के समक्ष एक चुनौती पेश कर दी। बेहतरीन संगीत और भावनात्मक कहानी से सजी ये फिल्म युवा और उम्रदराज, हर किस्म के दर्शकों को खूब भाई।

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