सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष रहे पहलाज निहलानी का पूरा कार्यकाल विवादों से भरा रहा। पहलाज से पहले शायद ही किसी अध्यक्ष ने फिल्मों पर इतनी कैंची चलाई हो। बॉलीवुड की कई हस्तियों ने बोर्ड के इस रवैए पर सवाल भी खड़े किए लेकिन पहलाज तो पहलाज ही थे, अड़े रहे।
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लिपस्टिक अंडर माय बुर्का
इन फिल्मों की वजह से हुआ जमकर विवाद
पहलाज से जुड़े विवादों का जिक्र होगा तो सबसे पहले नाम आएगा ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ फिल्म का। वजह इस फिल्म का बोल्ड विषय नहीं बल्कि सेंसर बोर्ड को उसी की पिच पर बोल्ड करना है। डायरेक्टर अलंकृता श्रीवास्तव की फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ को जब बोर्ड ने यह कहकर रोकने की कोशिश की कि इसका विषय बहुत ज्यादा महिला संबंधी और फैंटेसी बेस्ड है तो फिल्म डायरेक्टर्स की टीम ने फिल्म प्रमाणन अपीलीय ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटा दिया। नतीजा ये हुआ की फिल्म ‘ए’ सर्टिफिकेट के साथ रिलीज हो गई।
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लिपस्टिक अंडर माय बुर्का
फिल्म भी रिलीज हुई लेकिन उससे पहले उसका ट्रेलर आया। इस ट्रेलर ने सेंसर बोर्ड के हर सवाल का जवाब दिया। मीडिया की हर उस हेडलाइन को दिखाया जिसमें बोर्ड ने फिल्म में अड़ंगा लगाने की कोशिश की। ऑफबीट फिल्मों के लिहाज से देखें तो इस फिल्म ने बॉक्स आफिस पर धमाल मचा दिया। इस फिल्म ने अपनी लड़ाई न केवल जीती बल्कि सेंसर बोर्ड को चुनौती भी दी।
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जब हैरी मेट सेजल
सबसे हालिया मामला 'जब हैरी मेट सेजल' फिल्म से जुड़ा है। पहलाज निहलानी ने इस फिल्म के ट्रेलर में 'इंटरकोर्स' शब्द के इस्तेमाल से एतराज किया। लोगों ने जमकर विरोध किया। इस पर उन्होंने एक टीवी चैनल पर कहा कि अगर इसके पक्ष में एक लाख वोट आ जाएं तो वह इस शब्द को नहीं हटाएंगे। लेकिन एक लाख वोट आने के बाद भी जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तब उनका खूब मजाक बना।
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दम लगा के हईशा
आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर की फिल्म 'दम लगा के हईशा' में 'लेस्बियन' शब्द के इस्तेमाल पर भी सेंसर बोर्ड ने अपनी आपत्ति जताकर इसे म्यूट कर दिया। समलैंगिकता के मुद्दे पर बनी फिल्म 'अलीगढ़' को सेंसर बोर्ड द्वारा 'ए' सर्टिफिकेट दिया गया इस पर डायरेक्टर हंसल मेहता का बयान आया कि सेंसर बोर्ड को समलैंगिकता से नफरत है।
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अमर्त्य सेन
हाल ही में नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन पर बनी डॉक्यूमेंटरी 'एन आर्गुमेंटेटिव इंडियन' को लेकर सेंसर बोर्ड फिर चर्चा का विषय बना था। इस फिल्म में इस्तेमाल हुए ‘गाय’, ‘गुजरात’, ‘हिंदू भारत’ और ‘हिंदुत्व’ बोर्ड ने आपत्तिजनक बताकर फिल्म की रिलीज रोक दी।
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एनएच 10
अनुष्का शर्मा की फिल्म 'एनएच-10' के हिंसक और गाली गलौज वाले दृश्यों पर भी सेंसर बोर्ड ने आपत्ति जताई थी। हालांकि निर्माताओं के विरोध के बाद जीत फिल्म निर्माताओं की ही हुई थी।
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इंदु सरकार
1975 में लगे आपातकाल को लेकर बनी मधुर भंडारकर की फिल्म ‘इंदू सरकार’ पर भी बोर्ड की तिरछी नजर का शिकार हुई। एक और फिल्म जिसका जिक्र जरूरी है वह थी 'फुल्लू' जो कि महिलाओं को होने वाले पीरियड्स को लेकर बनी थी। इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने ‘ए’ सर्टिफिकेट दिया। सोशल मीडिया पर खूब हंगामा कटा। सवाल पूछे गए कि आखिर मासिक धर्म के विषय पर बनी फिल्म से सेंसर बोर्ड को क्या तकलीफ है?
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सेक्सुअल फैंटेसी जैसे मुद्दे पर बनी फिल्म 'फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे' के सेक्सुअल सीन्स पर सेंसर बोर्ड को आपत्ति थी लिहाजा फिल्म रिलीज नहीं हुई। फिल्म 'अनफ्रीडम' पर भी सेंसर बोर्ड ने अपना काला परदा डाल दिया। इस फिल्म मे दो औरतों के शारीरिक संबंधों को लेकर बोर्ड ने एतराज किया। जिसके बाद फिल्म रिलीज नहीं हुई। उनका मानना था कि इससे लोगों में 'अप्राकृतिक भावनाएं' जाग सकती हैं।