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क्लासिक सिनेमा: 50 के दशक की इन फिल्मों को अगर अब तक नहीं देखा तो तुरंत देख लीजिए

Mon, 10 May 2021 08:35 PM IST
दीपाली श्रीवास्तव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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50 के दशक की फिल्में
50 का दशक हिंदी सिनेमा के लिए सुनहरा दौर था। उस दौरान एक से बढ़कर एक अभिनेता-अभिनेत्री और फिल्ममेकर थे, जिनकी फिल्में आज भी लोगों के जेहन में बसी हुई हैं। उस दौर में हिंदी सिनेमा में राज कपूर, दिलीप कुमार, देव आनंद जैसे सुपरस्टार राज किया करते थे। अगर उस दौर की हसीनाओं की बात करें तो मधुबाला, नरगिस दत्त, वहीदा रहमान जैसी अभिनेत्रियां फिल्मों में अपना जादू चलाती थीं। इसके अलावा बेहतरीन फिल्में बनाने के लिए हमारे पास बिमल रॉय, महबूब खान, गुरुदत्त और बी.आर. चोपड़ा जैसे फिल्ममेकर भी थे। आज हम 50 के दशक की ऐसी ही कुछ शानदार फिल्मों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, जिन्हें अगर आपने अब तक नहीं देखा है तो फौरन देख लीजिए।
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फिल्म बाबुल का दृश्य
बाबुल (1950)

साल 1950 में आई फिल्म 'बाबुल' में लीड रोल में दिलीप कुमार, नरगिस दत्त और मुनव्वर सुल्ताना लीड रोल में थे। फिल्म का निर्देशन एस.यू. सनी ने किया था। फिल्म की कहानी एक जवान पोस्टमैन पर थी, जिसे एक अमीर लड़की से प्यार हो जाता है। इस फिल्म में लव ट्रिएंगल दिखाया गया है, जिसमें कई ट्विस्ट एंड टर्न्स आते हैं। उस दौर की ये बेहतरीन फिल्म है।
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फिल्म आवारा का दृश्य
आवारा (1951)

पुरानी फिल्मों की बात हो और उसमें राज कपूर की फिल्मों की बात ना हो तो बड़ी नाइंसाफी होगी। अब हम बात कर रहे हैं 'शोमैन' राजकपूर की फिल्म 'आवारा' के बारे में। इस फिल्म कपूर खानदान की तीन पीढ़ियों ने काम किया था। जी हां, फिल्म में राज कपूर के रियल लाइफ पिता पृथ्वीराज कपूर ने उनके पिता का रोल में अदा किया था। इसके अलावा फिल्म में राज कपूर के दादाजी बशवानाथ कपूर ने कैमियो किया था। फिल्म में शशि कपूर भी थी। उन्होंने राज कपूर के जवानी के दिनों का रोल अदा किया था। फिल्म में राज कपूर और नरगिस दत्त लीड रोल में थे।

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फिल्म बाजी का दृश्य
बाजी (1951)

गुरुदत्त की फिल्म 'बाजी' में सुपरस्टार देव आनंद ने मुख्य भूमिका निभाई थी। क्राइम-ड्रामा इस फिल्म में देव आनंद ने एक ऐसे जुआरी का रोल अदा किया था, जिस पर एक डांसर के हत्या का आरोप था। फिल्म में डांसर की भूमिका एक्ट्रेस गीता बाली ने निभाई थी। फिल्म 'बाजी' में प्यार, ड्रामा, क्राइम, सस्पेंस सबकुछ देखने को मिलेगा।
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फिल्म बैजू बावरा का दृश्य
बैजू बावरा (1952)

बहुत कम होता है कि म्यूजिक को लेकर कोई फिल्म बनी है और उसने कामयाबी के नए आयाम गढ़े हो। लेकिन फिल्म 'बैजू बावरा' ने ऐसा ही किया था। साल 1951 में रिलीज हुई ये फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी। फिल्म 'बैजू बावरा' 100 हफ्तों तक सिनेमाघरों में चलती रही थी। फिल्म में भरत भूषण और मीना कुमारी लीड रोल में थे और इसका निर्देशन विजय भट्ट ने किया था।
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फिल्म दो बीघा जमीन का दृश्य
दो बीघा जमीन (1953)

निर्देशक बिमल रॉय द्वारा निर्देशित फिल्म 'दो बीघा जमीन' एक सोशल ड्रामा फिल्म थी। इस फिल्म में बलराज साहनी और निरुपा रॉय मुख्य भूमिका में थे। फिल्म की कहानी गरीब किसान और उसके परिवार की मेहनत को लेकर थी। जो अपनी दो बीघा जमीन को जमींदार से बचाने के लिए संघर्ष करता है। 
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फिल्म परिणीता का दृश्य
परिणीता (1953)

साल 1953 में रिलीज हुई फिल्म 'परिणीता' रोमांस ड्रामा फिल्म थी, जिसमें अशोक कुमार और मीना कुमारी मुख्य भूमिका में थे। फिल्म का निर्देशन बिमल रॉय ने किया था। इसकी कहानी बंगाली नोवेल 'परिणीता' पर आधारित थी, जिसे शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था। फिल्म की कहानी में दो लोगों के बीच प्यार और नफरत दोनों ही दिखाया गया है।

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फिल्म बूट पॉलिश का दृश्य
बूट पॉलिश (1954)
 
निर्देशक प्रकाश अरोड़ा द्वारा निर्देशित फिल्म 'बूट पॉलिश' के निर्माता राज कपूर थे। फिल्म दो ऐसे भाई-बहन की कहानी को दिखाती है, जो अपनी आंटी के जबरन कहने पर भीख मांगने लगते थे। फिर जॉन अंकल के कहने पर दोनों बच्चे एक बूट पॉलिश की किट लेते हैं और लोगों के जूते पॉलिश करने लगते हैं। इसी बीच दोनों भाई बहन एक दूसरे से बिछड़ जाते हैं और आखिर में दोनों किस तरह से मिलते हैं। ये फिल्म की मुख्य कहानी है।

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फिल्म श्री 420 का दृश्य
श्री 420 (1955)

राज कपूर द्वारा बनाई गई शानदार फिल्मों में से एक फिल्म 'श्री 420' है। फिल्म में खुद राज कपूर ने बतौर लीड एक्टर अभिनय किया है। इसके अलावा उनके साथ फिल्म में नरगिस दत्त लीड रोल में थीं। फिल्म एक ऐसे गरीब लड़की की कहानी है, जो इलाहाबाद से मुंबई अपने सपनों को पूरा करे के लिए आता है। फिल्म में राज कपूर का रोल चार्ली चैपलिन से प्रेरित था, जो गम में भी खुशी की एक लौ तलाश लेता है।

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फिल्म मिस्टर एंड मिस 55 का दृश्य
मिस्टर एंड मिस 55 (1955)

फिल्म 'मिस्टर एंड मिस 55' बेहतरीन फिल्मो में से एक है। फिल्म में गुरुदत्त और मधुबाला लीड रोल में थे। फिल्म की कहानी कुछ ऐसी है कि अनीता के पिता अपनी मृत्यु से पहले एक शर्त पर अपनी बेटी के लिए सात लाख रुपये छोड़ते हैं कि इक्कीसवें जन्मदिन के एक महीने के अंदर उसे शादी करनी होगी। इससे अनीता की बुआ काफी नाराज होती है और वो ऐसा लड़का तलाश करने लगती है, जो शादी करने के बाद वसीयत मिलते ही अनीता को तलाक दे दे। वो ऐसा लड़का ढूढ़ने में कामयाब भी हो जाती है और आगे इसकी क्या कहानी होती है। ये बेहद दिलचस्प है। फिल्म को गुरदत्त ने ही बनाया था। 
 
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फिल्म झनक झनक पायल बाजे का दृश्य
झनक झनक पायल बाजे (1955)

आखिर में बात करते हैं वी शांतारात द्वारा निर्देशित फिल्म 'झनक झनक पायर बाजे' के बारे में। फिल्म की कहानी एक प्रेम कहानी पर आधारित थी। फिल्म में दो डांसर्स की कहानी है, जो अपने क्राफ्ट और प्यार में बैलेंस बनाने की कोशिश करते हैं। फिल्म में लीड रोल में मशहूर डांसर गोपी कृष्णा और निर्देशक शांताराम की पत्नी संध्या लीड रोल में थे।
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