फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बॉलीवुड से गायब हो गईं 'मोना डार्लिंग' और 'शबनम' जैसी वैंप, हीरोइनों के बोल्ड अवतार ने ले ली जगह

Mon, 04 Feb 2019 06:58 AM IST
अपूर्वा राय बीबीसी हिंदी
विज्ञापन
1 of 5
bollywood vamps
सिनेमा में एक विलेन हीरोइन को तंग कर कहानी में कई मोड़ लाता है, लेकिन वैंप कहानी में आकर एक पल में सब कुछ बदल देती है। ये है हिन्दी सिनेमा में वैंप की ताकत। अगर पुरानी हिंदी फिल्में देखें तो वैंप अक्सर बोल्ड कपड़े पहनती है। कहानी के किरदारों को अपने जलवों से प्रभावित करती है और गलत काम अपनी मर्ज़ी से करती है। 
विज्ञापन

2 of 5
साठ और सत्तर के दशक में वैंप के कैंप में नई अभिनेत्रियां आईं। वैंप का कहानी में एक अलग रोल होता है। वैंप कहानी में मोड़ लाती है, कुछ वैंप तो एक गाने में बोल्ड कपड़े पहनकर डांस करती है। हिन्दी सिनेमा की वैंप अपने एक किरदार या गाने से सालों तक लोगों को याद रही।
विज्ञापन

3 of 5
चाहे वो बिंदु का किरदार 'मोना डार्लिंग' हो या फिल्म 'कटी पतंग' का गाना- 'मेरा नाम शबनम' हो या फिर हेलेन हों, पदमा खन्ना हों, बिंदु हों, अरुणा ईरानी हों या शशिकला। पद्मा खन्ना की फिल्म 'जॉनी मेरा नाम' का गाना 'हुस्न के लाखों रंग' लोगों को बहुत पसंद। हेलेन के बहुत से गाने तो सुपरहिट रहे। अरुणा ईरानी को 1992 में आई अनिल कपूर और माधुरी की फिल्म 'बेटा' में नेगेटिव किरदार के लिए आज भी याद किया जाता है।

4 of 5
बीबीसी से खास बातचीत में 'मोना डार्लिंग' बनी बिंदु ने बताया था कि उन्हें रोल ही वैंप के मिले। बिंदु ने कहा, "जब मैंने शुरुआत की तो खलनायिका का दौर था। मैं बनना हीरोइन चाहती थी, लेकिन किसी ने कहा कि मैं बहुत पतली हूं। हिंदी ठीक से नहीं बोल सकती। बहुत लंबी हूं फिर वही मेरी कमियां लोगों को पसंद आई। मैंने शुरुआत की फिल्म 'दो रास्ते' के साथ और मैं बन गई विलन।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
kajol
अस्सी और नब्बे के दशक तक आते-आते वैंप के किरदार में बदलाव आया। अब हीरोइन भी उतनी बोल्ड थी जितनी वैंप। अब वैंप तो कोई रिश्तेदार ही निकलती। चाहे 'राजा हिन्दुस्तानी' की करिश्मा कपूर की सौतेली मां हो या फिल्म 'बेटा' की सौतेली मां लेकिन अब कोई ऐसी अभिनेत्री नहीं थी जो ख़ासकर वैंप के रोल करती हो। नब्बे के दशक के अंत तक हीरोइन भी विलन बनने को राजी थी। चाहे वो 'गुप्त' में काजोल हो या 'प्यार तूने क्या किया' में उर्मिला मातोंडकर हो। कुछ इस तरह हिन्दी सिनेमा से वैंप हुई ग़ायब।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें