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ये हैं हिंदी सिनेमा के 10 दिग्गज डायरेक्टर, एक ही साल में हुई थी इन 2 महान निर्देशकों की मौत

Wed, 02 May 2018 07:50 AM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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Bollywood
फिल्म देखते वक्त हमारे जहन में केवल फिल्म के लीड स्टार्स ही होते हैं, लेकिन उसे पर्दे पर सींचने वाला डायरेक्टर हमे कभी याद नहीं रहता है। एक डायरेक्टर ही होता है जो फिल्म के सभी सीन्स को तेैयार करता है।तो ऐसे में बात करेंगे भारतीय सिनेमा के ऐसे 10 डायरेक्टर की जिनकी फिल्में सिनेमा में आने के बाद हिट होनी तय थी...
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सत्यजीत रे (1921-1992)

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Satyajit Ray
इस कड़ी में पहला नाम लेना चाहेंगे सत्यजीत रे का।सत्यजीत रे के बारे में अगर कहा जाए कि उन्होंने घुटनों पर चल रहे भारतीय सिनेमा को चलना सिखाया तो गलत नहीं होगा। सत्यजीत रे कलकत्ता में 1921 में पैदा हुए थे। उन्होने ज्यादा बंगाली सिनेमा में ही हाथ आजमाया। उनकी पहली फिल्म 'पाथेर पांचाली' ने कई अवार्ड जीते। हिन्दी में उन्होने 'शतरंज के खिलाडी' जैसी फिल्म बनाई जो हिन्दी सिनेमा की यादगार फिल्म है। भारत रत्न सत्यजीत रे को भारतीय सिनेमा का सबसे बेहतर डायरेक्टर कहा जाता है।सत्यजीत रे को 1992 में भारत रत्न दिया गया था।
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गुरुदत्त (1925-1964)

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Gurudutt
गुरुदत्त की फिल्म 'प्यासा' भारतीय सिनेमा का शानदार नगीना है। जिन्होंने उनकी ये अकेली फिल्म भी देखी है वो ये जानता है कि गुरुदत्त कितने बड़े कलाकार थे। गुरुदत्त महज 39 साल की उम्र में इस दुनिया से चले गए। लेकिन छोटी सी जिंदगी में उन्होंने कई बड़े काम किए जिसका गवाह उनकी फिल्में हैं। उनकी फिल्मों में प्यासा, कागज के फूल, चौदहवी का चांद और साहिब बीवी और गुलाम जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में शामिल हैं।

बिमल रॉय (1909-1965)

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Bimal Roy
बिमल रॉय भारतीय सिनेमा के महान निर्देशकों में शुमार हैं। उन्होंने दो बीघा जमीन, मधुमति, सुजाता और बंदिनी जैसी फिल्में बनाई। ना सिर्फ उन्होंने हमें ये कालजयी फिल्में दीं बल्कि गीतकार गुलजार को तराश कर हीरा बनाने का श्रेय भी बिमल दा को ही जाता है। उन्होंने ही गुलजार को एक गैराज से निकाल कर फिल्मों से जोड़ा।
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महबूब खान (1907-1964)

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Mehboob Khan
पहली बार भारत की जिस फिल्म को ऑस्कर के लिए चुना गया वो थी 'मदर इंडिया'। मदर इंडिया को बनाया महान निर्देशक महबूब खान ने। महबूब खान के नाम पर कई शानदार फिल्में हैं। लेकिन मदर इंडिया अकेले ही महबूब खान को सर्वश्रेष्ठ निर्देशकों में शामिल करने को काफी है।
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ऋषिकेष मुखर्जी (1922-2006)

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hrishikesh mukerji
ऋषिकेष मुखर्जी का भारतीय फिल्मों में योगदान बेजोड़ है। उनकी कुछ फिल्मों के नाम ही उनका काम बताने को काफी हैं। उन्होंने सत्यकाम, आनंद, गुड्डी, गोलमाल, अभिमान, नमक हराम और बावर्ची जैसी सुपरहिट फिल्में बनाईं।
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राज कपूर (1924-1988)

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Raj Kapoor
ग्रेट शो-मैन राज कपूर को भारत के दर्शक खूब जानते हैं। एक्टर, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर राज कपूर ने लंबे वक्त तक बॉलीवुड पर राज किया। 'आग' से 'राम तेरी गंगा मैली' तक राज कपूर के नाम पर शानदार फिल्मों की लंबी फेहरिस्त है।

शक्ति सामंत (1926-2009)

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shakti Samant
शक्ति सांमत ने अराधना, कश्मीर की कली, कटी पतंग, अमर प्रेम, एन इवनिंग इन पेरिस जैसी फिल्में भारतीय सिनेमा को दी। उन्होंने बंगाली में भी कुछ फिल्में दीं।

बासु चटर्जी (1930)

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Basu Chatterji
'एक रुका हुआ फैसला' जैसी फिल्म बनाकर बासु चटर्जी ने सिनेमा को नई दिशा दी। उन्होंने एक कमरे के भीतर ही ये फिल्म बनाई थी। उन्होंने कमला की मौत, चितचोर, रजनीगंधा, छोटी सी बात, बातों-बातों में, पिया का घर जैसी फिल्में दीं जो हर लिहाज से बेजोड़ हैं।

श्याम बेनेगल (1934)

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shyam Benegal
आर्ट फिल्मों का जब नाम आता है, तो श्याम बेनेगल सबसे पहले जहन में आ जाते हैं। उन्होंने अंकुर, निशांत, मंथन, भूमिका, जुबैदा जैसी फिल्में दी हैं। श्याम बेनेगल के बारे में कहा जाता है कि वो पैसे के लिए नहीं कुछ अलग और अच्छा करने के लिए फिल्म बनाते हैं। उनकी इसी खूबी ने उन्हे निर्देशकों में ऊंचा मुकाम दिला रखा है।
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प्रकाश मेहरा (1939-2009)

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Prakash Mehra
अमिताभ बच्चन के स्टार बनाने में प्रकाश मेहरा की फिल्में भी अहम जगह रखती हैं। उन्होंने मुकद्दर का सिकंदर, लावारिस, नमक हलाल, शराबी जैसी फिल्में दीं जो उन्हें सर्वश्रेष्ठ निर्देशकों की लिस्ट में खड़ा करती हैं।
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