आगे लेटर में लिखा है कि रानी पद्मावती द्वारा रेप के बजाए जौहर को ज्यादा तरजीह देने का फैसला उनका अपना था। सही हो, गलत हो, कमजोर हो या सशक्त, फैसला चाहे जैसा भी हो, इस पर राय देने के लिए सभी स्वतंत्र हैं। उस वक्त जिन महिलाओं ने जौहर करने का फैसला लिया उन्हें क्यों छोटा या गुनहगार महसूस कराया जाए क्योंकि उन्होंने गुलामी के जीवन और पीटकर मार दिए जाने के बजाए अपनी हिफाजत का यह रास्ता चुनना सही समझा। 700 साल पहले के वक्त को लेकर इस आधार पर क्यों किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाए कि 'आज मैं क्या करती'? यह पद्मावती का अपना फैसला था कि उसे खिलजी के सामने नहीं झुकना था। यह उसका अपना चुनाव था, ऐसे में 'रेप के बाद भी जिंदगी है' का कोई सवाल ही नहीं उठता।