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एजुकेशन सिस्टम के करप्शन को खोलकर रखती हैं ये 5 फिल्में, एक-एक फिल्म है बड़े काम की

Sun, 02 Sep 2018 03:16 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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बॉलीवुड और शिक्षा का नाता शुरुआती दौर से ही रहा है। फिल्म जागृति में दिखाया गया था कि कैसे एक अध्यापक को अपने छात्रों से पेश आना चाहिए। वहीं, आज के दौर में फिल्म 3 इडियट्स ने ये बतला दिया कि छात्रों को कैसे पढ़ाया जाना चाहिए। ऐसी कई फिल्में हैं जो भारत के एजुकेशन सिस्टम के लचीलेपन की तस्वीर बयां करती हैं। तो आइए जानते हैं इन फिल्मों के बारे में...
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साल 2007 में रिलीज हुई फिल्म 'तारे जमीन पर' तो ज्यादातर लोगों ने देखी ही होगी। फिल्म में आमिर खान ने एक आर्ट टीचर की भूमिका प्ले की है जो बच्चों को गाकर, खिलाकर पढ़ाने में विश्वास करते हैं। वहीं, उनकी क्लास में पढ़ने में कमजोर छात्र ईशान अवस्थी पर उनका पूरा ध्यान रहता है। ऐसे में वे ईशान के अंदर के टैलेंट को पहचानकर उसे उसकी राह पर ले जाने का काम करते हैं। साथ ही वे स्कूल के मैनेजमेंट और अध्यापकों के छात्रों के प्रति रवैये का भी पूरजोर विरोध करते हैं। 
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इसके दो साल बाद साल 2009 आमिर खान एक बार फिर शैक्षिक फिल्म '3 इडियट्स' में नजर आए। इस फिल्म का भी वही कॉन्सेप्ट था जो 'तारे जमीन पर' में देखने को मिला। यही कि बच्चे का जिस विषय में ज्यादा रुझान हो उसे वहीं करने दें। ऐसे में तीन छात्रों पर आधारित फिल्म '3 इ़डियट्स' में आमिर ने ये भी बताया कि पढ़ाया कैसे जाता है और इतना ही नहीं फिल्म में यह भी दिखाया गया है कि छात्रों पर जरूरत से ज्यादा प्रेशर डालने से वे आत्महत्या करने का प्रयास करते हैं। फिल्म में एक सीन ऐसा दिखाया भी गया है कि जब एक छात्र के प्रोजेक्ट को बिना देखे रिजेक्ट कर दिया जाता है। यकीनन इस फिल्म को देखने के बाद कई ऐसे छात्र रहे होंगे जो फिल्म से बहुत ही प्रेरित हुए होंगे।

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साल 2012 में बॉलीवुड के चॉकलेटी लुक एक्टर शाहिद कपूर को भी शिक्षा पर आधारित फिल्म 'पाठशाला' में टीचर का रोल करने का मौका मिला। इस फिल्म में वह एक डांस टीचर होते हैं जो स्कूल के प्रशासकीय तौर-तरीके, अध्यापकों के रवैये और बच्चों पर ज्यादा प्रेशर के खिलाफ जाकर सिस्टम को बदलने का प्रयास करते नजर आते हैं। 
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फिल्म 'फकीरचंद एंड लकीरचंद युनिवर्सिटी' यानी कि 'फालतू' ये शिक्षा पर आधारित एक कॉमेडी फिल्म है। इस फिल्म को कोरियोग्राफर रेमो डिसुजा ने डायरेक्ट किया है। फिल्म में भी शिक्षा प्रणाली, पैरेंट्स का दबाव और हर छात्र को दिल की बात सुनने की बात कही गई है।35 से 70 प्रतिशत नंबर की श्रेणी में कई छात्र आते हैं, जिन्हें बड़े कॉलेज में एडमिशन नहीं मिलता। इंजीनियरिंग और मेडिकल तो छोड़िए उन्हें सामान्य कोर्स में भी दाखिला नहीं मिलता।फिल्म में जैकी भागननी मुख्य किरदार में हैं। साथ ही अंगद बेदी और पूजा गुप्ता भी फिल्म में नजर आए हैं। दरअसल, यह फिल्म तीन पढ़ने में कमजोर दोस्तों पर आधारित है जो खुद का कॉलेज खोलना चाहते हैं। 
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फिल्म 'आरक्षण' हमारी शिक्षा प्रणाली की मौजूदा स्थिति को विस्तृत परंतु एक उतावलेपन के साथ दर्शाया गया है। यह फिल्म शैक्षित आरक्षण के मसले को लेकर आरंभ होती है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत का आरक्षण तय करने पर बात की गई है। अमिताभ बच्चन, सैफ अली खान, मनोज बाजपेयी और दीपिका पादुकोण फिल्म में नजर आए। यह एक सामाजिक-राजनीतिक फिल्म है जिसे प्रकाश झा ने डायरेक्ट किया है। पिछड़ों और एससी /एसएसटी को सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिलने पर आधारित इस फिल्म में कई पहलुओं को समझाने की कोशिश की गई है।
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