Taapsee Pannu
- फोटो : मुंबई टीम, अमर उजाला
महिलाओं की बायोपिक इधर खूब बन रही हैं, मणिकर्णिका, शकुंतला, साइना नेहवाल, पीवी सिंधू और भी कई नाम हैं। इस बदलाव को आप कैसे देखती हैं?
मुझे तो यह बदलाव बहुत अच्छा लग रहा है। कहानी चाहे मर्द की हो या किसी महिला की, सुनाने लायक दोनों होती हैं। आप को एक बायोपिक की कहानी में क्या देखने को मिलता है, पैसों की तंगी, अवसरों की दिक्कतें, पर एक महिला के साथ उसके महिला होने के कारण जुड़ी दिक्कतें भी आ जाती हैं। उसके संघर्ष और इस बीच आई कठिनाइयों को दर्शाना और भी अच्छा हो जाता है। तब जाकर यह कहानी सुनाने लायक बनती है। इसीलिए महिलाओं पर आजकल ज्यादा बायोपिक्स बन रही हैं। इतिहास ने तो महिलाओं को ज्यादा मौका नहीं दिया, शायद इस तरह हम उन महिलाओं की कहानी बता पाएं जिन्होंने बड़े काम किए हैं।
पहले मनमर्जियां, अब सांड की आंख और इसके बाद अनुराग कश्यप के साथ एक और फिल्म आप कर रही हैं, वह क्या है?
ये एक साइंस फिक्शन फिल्म है, जो काफी हद तरह सुपरनेचुरल भी है। थ्रिलर भी है। सच कहूं तो उस फिल्म को किसी शैली में डालना बड़ा कठिन है क्योंकि इस तरह का सिनेमा भारत में कभी नहीं बना है। अनुराग कश्यप कर रहे हैं कुछ तो अलग होगा ही।