परतापुर रेलवे स्टेशन पर फिल्म सांड की आंख शूटिंग
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डॉक्टर यशपाल जो डॉक्टरी छोड़ गांव की बेहतरी करने के इरादे के साथ वहां एक शूटिंग रेंज खोलते हैं, और बच्चों को बुलाने के लिए गांव के सरपंच सतपाल सिंह के घर पहुंचते हैं। हालांकि सतपाल सिंह घर की लड़कियों को भेजने के लिए रजामंद नहीं होते हैं। लेकिन अपनी पोतियों के सुनहरे भविष्य और सरकारी नौकरी की चाह में प्रकाशी और चंद्रो छुपते-छुपाते अपनी पोतियों को लेकर शूटिंग रेंज पहुंच जाती हैं।