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शेखर सुमन ने बताया इंडस्ट्री में कैसे काम करता है 'बॉलीवुड गैंग', कहा- 'उनकी चापलूसी करें तो ठीक वरना...'

Tue, 28 Jul 2020 12:31 PM IST
shrilata biswas एंटरनेटमेंट डेस्क, अमर उजाला
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शेखर सुमन और सुशांत सिंह राजपूत - फोटो : सोशल मीडिया
सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद लगातार सीबीआई जांच की मांग की जा रही है। अभिनेता शेखर सुमन अपने ट्विटर हैंडल से सीबीआई जांच को लेकर ट्वीट्स कर रहे हैं। शेखर सुमन ने सुशांत के पिता से उनके पटना स्थित घर पर मुलाकात भी की थी। अब एक बार फिर से शेखर सुमन ने बॉलीवुड में गुटबाजी को लेकर सवाल उठाए हैं।
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सुशांत सिंह राजपूत के पिता से मुलाकात करते शेखर सुमन - फोटो : सोशल मीडिया
एक टीवी चैनल से बात करते हुए शेखर सुमन ने कहा कि 'मैं शुरू से कह रहा हूं कि भाई भतीजावाद या वंशवाद का ये मामला नहीं है। इसमें कोई हर्ज नहीं है। अगर मैं निर्माता हूं तो मैं अपने भाई को मौका दूंगा, अपने बेटे को मौका दूंगा, अपने दोस्त को मौका दूंगा। जान पहचान के लोगों को मौका देना, यह समस्या ही नहीं है। वो तो बिल्कुल जायज है। समस्या तब खड़ी होती है जब आप किसी दूसरे को मौका ना दें। बाहर के किसी अभिनेता को चाहे वो छोटे शहर से हो या बड़े शहर से हो, अगर वो किसी बड़ी फिल्म में काम कर रहा है, तो ये गैंग उसे फिल्म से निकलवा देती है और अपने लोगों को फिट कर देती है।'
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शेखर सुमन - फोटो : सोशल मीडिया
शेखर आगे कहते हैं, 'छोटे और बड़े शहर की बात नहीं है, जो इनकी बात नहीं मानता है उसके लिए काम करना मुश्किल हो जाता है। आप इनकी बात मानेंगे तो ये अपने हिसाब से काम करवाते हैं। इनकी जी हुजूरी और चापलूसी करनी पड़ती है। ये जो गुंडों की जमात है इन्होंने पूरी इंडस्ट्री को कंट्रोल में करके रखा हुआ है। कौन सी फिल्म कब लॉन्च होगी। कौन सी फिल्म कब रिलीज होगी। कौन से थियेटर में रिलीज होगी। थियेटर में भी इनका कब्जा है। थियेटर की तारीखों पर भी इनका कब्जा है।'

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शेखर सुमन - फोटो : सोशल मीडिया
शेखर कहते हैं कि 'जो छोटे शहर से आते हैं उनके लिए तो पहले से ही इनके दरवाजे बंद होते हैं। उनके लिए कोई उम्मीद नहीं है। नेपोटिज्म में किसी भी स्टार किड्स को आसानी से मौका मिल जाता है और ये बहुत बड़ी बात है। जो बाहर से हैं उन्हें संघर्ष करना पड़ता है लेकिन आखिर में दर्शक ही तय करते हैं कि कौन स्टार बनेगा और कौन नहीं बनेगा। उसमें भी ये गैंग लगातार अपने ही लोगों को दर्शकों के सामने थोपता रहता है तो दर्शकों के पास भी कोई चारा नहीं बचता कि उन्हीं लोगों को देखें जिन्हें दिखाया जा रहा है।'
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शेखर सुमन और अध्ययन सुमन - फोटो : सोशल मीडिया
शेखर सुमन अपने सफर के बारे में बताते हैं कि 'मुझे भी इस भाई भतीजावाद का सामना करना पड़ा है। मैं फिल्म इंडस्ट्री छोड़कर उस जमाने में टीवी पर आया। जबकि उस वक्त टीवी काफी छोटा समझा जाता था। मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा था। बहुत मन मार के टीवी पर आया था। हालांकि टीवी ने मुझे बड़ा बना दिया। कई लोगों की पूरी कोशिश थी कि मुझे पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए लेकिन आखिर में मुझे सफलता मिली। मेरे बेटे अध्ययन सुमन के साथ भी यही हुआ था। करियर के शुरुआती सफलता के बाद उसे 12-14 फिल्में मिलीं लेकिन उससे सारी फिल्में छीन ली गईं।'
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