'दिल बेचारा' का ट्रेलर लॉन्च
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बच्चे जब भी अपने माता पिता से कहानियां सुनाने की जिद करते हैं तो बेचारे थके हारे मां बाप झुंझलाहट में कभी कभी कह देते हैं, एक था राजा, एक थी रानी, दोनों मर गए खत्म कहानी। लेकिन जिन्होंने अपना बचपन दादी और नानी के साथ बिताया है, वे जानते हैं कि दादी हों या नानी, उनकी कहानी बच्चों के लिए कभी एक लाइन की और ऐसी दुखांत कतई नहीं होतीं। दादी का राजकुमार लड़ाई जीतता ही है। नानी की राजकुमारी एक दिन रानी बनती ही है। दुख ये है कि ये ट्रेलर इसी लाइन से शुरू होता है और ये भी बताता है कि आज के लेखक अपनी जड़ों से कितना ऊपर निकल गए हैं। पता नहीं खार, बांद्रा और जुहू के एसी बंगलों या ऊंची इमारतों से वे नीचे देखते भी हैं कि नहीं।