surveen chawla
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कहीं तो होगा या कसौटी जिंदगी की जैसे धारावाहिकों की चारू और कसक बजाज और कहां सेक्रेड गेम्स की जोजो? अपने किरदारों के इस विकास के बारे में आपका क्या कहना है?
लोगों को समय के साथ विकसित होना ही चाहिए। एक जगह से दूसरी जगह तक छलांग लगानी ही चाहिए। स्थिर रहने में जीवन नहीं है। अपनी खींची लकीरों को खुद ही दूसरी लंबी लकीर खींचकर छोटा करते रहना ही विकास है। अंत में क्या हुआ या होगा, यह महत्वपूर्ण नहीं है, ज्यादा अहम ये है कि इस प्रक्रिया को आपने जिया। एक किरदार में घूंघट में रहना और दूसरे किरदार में गालियां देना, यही एक कलाकार का विकास है।