'यमला पगला दीवाना फिर से' को दर्शकों-समीक्षकों ने खारिज कर दिया। कमजोर कहानी और लचर अभिनय ने सबको दुखी किया। लोग हैरान हैं कि ऐसा क्या है जो सितारा हैसियत करोड़ों फैन्स और धन-संपदा की चिंता न होने के बावजूद धर्मेंद्र और उनके दोनों बेटे लगातार नाकाम हैं। साल 2000 के बाद से सनी-बॉबी ने 50 से ज्यादा फ्लॉप फिल्में दी हैं...
बॉलीवुड में देओल उन परिवारों में है जिनकी दो-दो पीढ़ियां फिल्मों में सक्रिय हैं लेकिन मुश्किल यह कि धर्मेंद्र और उनके दोनों बेटे सनी-बॉबी फिल्मों में बिल्कुल नहीं चल पा रहे। शुक्रवार को रिलीज हुई उनकी 'यमला पगला दीवाना फिर से' का बॉक्स ऑफिस वीकेंड बताता है कि यह तिकड़ी लोकप्रियता के बावजूद नाकाम है। फिल्म को समीक्षकों-दर्शकों ने सिरे से नकार दिया। फिल्म ने तीन दिन में बमुश्किल पांच करोड़ का बिजनेस किया।
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yamla pagla deewana
रिकॉर्ड बताते हैं कि इनकी आखिरी सफल फिल्म 'यमला पगला दीवाना' 2011 में आई थी। इसके बाद धर्मेंद्र 'टैल मी ओ खुदा', 'यमला पगला दीवाना-2' और 'सेकेंड हेंड हस्बेंड' में दिखे। तीनों फ्लॉप थीं। बॉबी देओल 'यमला पगला दीवाना-2', 'पोस्टर बॉय्ज' तथा 'रेस-3' में आए। 'रेस-3' में सारा श्रेय सलमान का था और बाकी दो फिल्में फ्लॉप थीं। सनी 2011 के बाद 'यमला पगला दीवाना-2' 'सिंह साब द ग्रेट' 'डिश्क्यांऊ', 'आई लव एनवाई', 'घायल वंस अगेन' और 'पोस्टर बॉय्ज' में आए और सभी नाकाम रहीं।
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कुल हिसाब यह कि देओल परिवार के तीनों सदस्यों को लगातार नाकामियां झेलनी पड़ रही हैं। जबकि तीनों के फैन्स की संख्या करोड़ों में है। तब भी इनकी फिल्में क्यों नहीं चल पा रहीं, इसके कुछ सरल कारण दिखते हैं। धर्मेंद्र की उम्र हो चली है और वह अधिक काम नहीं करते। सनी देओल अपनी ढाई किलो के हाथ वाली इमेज से बाहर निकलना नहीं चाहते। बीच में उन्होंने 'काशी का अस्सी' जैसी फिल्म में गंभीर काम करने की कोशिश की परंतु निर्माता से विवाद में फिल्म अटक गई।
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बॉबी देओल
बॉबी स्टारडम की रेस से बाहर हैं परंतु इसे स्वीकारने को तैयार नहीं हैं। उनकी हर वापसी पिछली बार से खराब होती है। उन्हें लेकर निर्देशकों-लेखकों ने सोचना ही छोड़ दिया है। बॉबी को भले ही इस बात का एहसास न हो परंतु सनी मीडिया से बातचीत में हैरानी जता चुके हैं कि क्या वजह है, जो लेखक-निर्देशक से कहां गड़बड़ हो गई।
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bobby deol
जानकारों के अनुसार खुद देओल बंधुओं को अपनी विफलताओं के बारे में गहराई से सोचने का समय आ गया है क्योंकि अब उनकी नई पीढ़ी पर्दे पर आने को तैयार है। इस विफलता की छाया से उसे दूर रखने के लिए समय से ताल मिलाना जरूरी है। इंडस्ट्री में देओल ज्यादा घुलते-मिलते नहीं हैं। खेमेबाजी और राजनीति से दूर रहते हैं। नए लेखकों-निर्देशकों की उन तक पहुंच नहीं है। वह ऐसे लोगों से घिरे हैं जो उन्हें नाकामियों की हकीकत देखने नहीं देते।
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यमला पगला दीवाना
देओल विफलताओं को पढ़ पाते 'यमला पगला दीवाना-2' के बाद तीसरी फिल्म नहीं बनाते। लेकिन समस्या यह है कि इंडस्ट्री में सितारे धन के चश्मे से सब कुछ देखते हैं। 2013 में 'यमला पगला दीवाना-2' ने भले ही टिकट खिड़की पर करीबी साढ़े छह करोड़ ही कमाए थे परंतु सैटेलाइट से फिल्म को 27 करोड़ और डिजिटल से नौ करोड़ रुपये डील में मिले। अत: तीसरी फिल्म बनी। मगर दूसरी फिल्म की नाकामी से उन्होंने कुछ सीखा हो, ऐसा 'यमला पगला दीवाना फिर' में कहीं नजर नहीं आता। धर्मेंद्र इस फिल्म के बाद कब पर्दे पर दिखेंगे कहा नहीं जा सकता परंतु सनी-बॉबी के लिए राह आसान नहीं है।
सनी की रुकी हुई फिल्में 'काशी का अस्सी' और 'भैय्याजी' सुपर हिट आने वाले महीनों में रिलीज हो सकती हैं। जो उनका रिकॉर्ड ही खराब करेंगी। जबकि बॉबी को नए सिरे से फिल्मों की तलाश करनी होगी। कहने को सनी-बॉबी स्टार हों परंतु बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड देंखें तो 'यमला पगला दीवाना' से पहले उनकी आखिरी हिट फिल्में जानने के लिए आपको बहुत पीछे जाना होगा। सनी की इससे पहले इंडियन 2001 में हिट हुई थी और बॉबी की बादल साल 2000 में सफल थी। स्टारडम का हिसाब यह है कि 2001 से सनी ने 26 और बॉबी ने 29 फ्लॉप या औसत फिल्में दी हैं। यानी दोनों ने मिल कर 2000 के बाद से अभी तक 50 से ज्यादा फ्लॉप दी हैं।