मुझे जीने दो
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एक दिन का जिक्र करते हुए वहीदा रहमान कहती हैं, 'मैं, फिल्म की दूसरी कलाकार निरूपा रॉय और नरगिस एक खाट पर बैठकर अमरूद काट कर खा रहे थे। तभी अचानक सुनील जी आते हैं और कहते हैं कि वहीदा जी, निरुपा जी फटाफट उठिए। नरगिस ने उनसे पूछा कि क्या हुआ? इतनी जल्दी क्या है? तो उन्होंने चिल्लाकर कहा कि आप सवाल बहुत पूछती हैं। जल्दी उठिए और जाकर जीप में बैठिए। हम लोग उठे और जीप की ओर चल दिए। सुनील जी के साथ बीएसएफ के कमांडर भी थे। जब वह आए, तब उनका चेहरा देखकर हमें अंदाजा हुआ कि यहां कुछ तो गंभीर समस्या है। उसके बाद उन्होंने हम लोगों को टेंट में छोड़ दिया। इस फिल्म की शूटिंग के लिए हमें टेंट में रहना पड़ता था।'