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जब नरगिस को सामने देख नहीं फूटे सुनील दत्त के बोल, 20 फिल्मों में डाकू बनकर बनाया रिकॉर्ड

Sat, 25 May 2019 05:18 AM IST
अरविंद अरविंद एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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Sunil Dutt, Nargis - फोटो : social media
पाकिस्तान में जन्मे अभिनेता सुनील दत्त की गिनती उन सितारों में होती है जिन्होंने सबसे पहले सरहद पर डटे फौजियों के लिए काम करना शुरू किया। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजनीति में आए सुनील दत्त को पूरे देश में प्यार मिला। सुनील दत्त की 14वीं पुण्यतिथि पर उनकी यादों के कुछ किस्से। सुनील का निधन 25 मई 2005 को मुंबई के बांद्रा में हुआ था। 
 
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sunil dutt
शुरूआती संघर्ष
सुनील जब पांच साल के थे तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई। खुर्द झेलम में जन्मे सुनील दत्त 18 साल की उम्र में भारत-पाकिस्तान में छिड़े दंगों का भी शिकार हुए। उस वक्त सुनील दत्त को उनके दोस्त याकूब ने परिवार समेत अपने घर में पनाह देकर बचाया। वहां से सुनील दत्त का परिवार पंजाब के मंडोली गांव में आकर बसा। लखनऊ आकर उन्होंने अपने कॉलेज की पढ़ाई की शुरूआत की। फिर मुंबई जाकर सुनील दत्त ने जय हिन्द कॉलेज में दाखिला लिया और बतौर क्लर्क मुंबई की बिजली और परिवहन कंपनी बेस्ट में काम करने लगे। सुनील दत्त का असली नाम बलराज दत्त था। जब वह फिल्मों में आए तो उस वक्त बलराज साहनी मशहूर सितारे थे, इसी के चलते उन्होंने अपना नाम बदलकर सुनील दत्त कर लिया।
 
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nargis
रेडियो सीलोन का किस्सा
सुनील दत्त की अभिनेता बनने की इच्छा बंबई आने से पहले ही थी। लेकिन, नौकरी मिली सीलोन रेडियो में। उनकी आवाज के दीवाने लोग रेडियो के दिनों से थे लेकिन जिस शख्सियत के सुनील दत्त दीवाने थे वह थीं नरगिस। लेकिन, एक दिन ऐसा भी आया जब सुनील दत्त का सामना नरगिस से हुआ तो उनके मुंह से बोल ही नहीं फूटे। जी हां, रेडियो सीलोन को इंटरव्यू देने के लिए नरगिस ने टाइम दिया तो ये काम सुनील दत्त को ही सौंपा गया। पर इंटरव्यू शुरू हुआ तो इतनी खूबसूरत अभिनेत्री को देख वह कुछ बोल ही न सके। नरगिस की सलाह पर ये इंटरव्यू उस दिन कैंसिल कर दिया गया।

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mother india - फोटो : social media
पहली फिल्म 
सुनील दत्त रेडियो पर फिल्मी सितारों का खास इन्टरव्यू लिया करते थे। जिसके लिए उन्हें 25 रुपये प्रति माह मिला करते थे। बतौर रेडियो अनाउंसर  सुनील दत्त ने खूब नाम कमाया, पर वह एक्टिंग करने में ज्यादा रुचि रखते थे।1955 में बनी 'रेलवे स्टेशन' उनकी पहली फिल्म थी। लेकिन असली नाम और शोहरत उन्हें फिल्म मदर इन्डिया ने ही दी। 1957 में रिलीज हुई 'मदर इंडिया' ने उन्हें पहचान दिलाई। इस फिल्म में वह नरगिस के बिगड़ैल बेटे बने थे, जिसे मां अपने हाथों से गोली मार देती है।
 
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mother india
आग में तपी प्रेम कहानी
मदर इंडिया की ही शूटिंग के दौरान हुआ यूं कि एक सीन के दौरान सेट पर आग लग गई और नरगिस उसमें फंस गईं। सुनील दत्त एक हीरो की तरह आग में कूदे और नरगिस की जान बचाई। आग वाले हादसे के बाद नरगिस का नजरिया सुनील दत्त को लेकर पूरी तरह बदल गया। इसी बीच सुनील दत्त की बहन बीमार पड़ गईं। बिना सुनील दत्त को बताए नरगिस उनकी बहन को लेकर अस्पताल चली गईं और इलाज करवाया। दोनों के प्यार पर बंबई के तमाम लोगों को एतराज था और एक अंडरवर्ल्ड डॉन ने भी इनकी शादी रुकवाने की कोशिश की।
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नरगिस-सुनील दत्त
परदे का मशहूर डाकू
सुनील दत्त को मदर इंडिया ने स्टार बनाया और डाकुओं पर बनी फिल्मों ने सुपरस्टार। वह हिंदी सिनेमा के इकलौते ऐसे हीरो हैं जिसने 20 फिल्मों में डाकू के रोल किए। फिल्म मुझे जीने दो के लिए उन्हें 1964 का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला। इसके अलावा फिल्म खानदान के लिए भी सुनील दत्त को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।


 
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sunil dutt
मशहूर फिल्में
सुनील दत्त की प्रमुख फिल्मों में साधना (1958), सुजाता (1959), मुझे जीने दो (1963), गुमराह (1963),वक़्त (1965), खानदान (1965), पड़ोसन (1967) और हमराज़ (1967) उल्लेखनीय हैं। भारत सरकार ने1968 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। सुनील दत्त की आखिरी फिल्म रही मुन्नाभाई एमबीबीएस। फिल्म यादें (1964) के लिए सुनील दत्त को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। इस पूरी फिल्म में सिर्फ सुनील दत्त ही हैं। नरगिस की एक झलक फिल्म के आखिरी सीन में मिलती है।
 

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Sunil Dutt - फोटो : twitter
राजनैतिक करियर 
एक सफल अभिनेता और निर्देशक की पारी खेलने के बाद सुनील दत्त ने 1984 में राजनीति की ओर रुख कर लिया। राजनीति में वह अपने दोस्त राजीव गांधी की मदद करने उतरे। कांग्रेस की टिकट पर मुंबई उत्तर पश्चिम लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बने और यहां से लगातार पांच बार चुने जाते रहे। वह भारत के युवा और खेल मामलों के मंत्री भी रहे। इस पद पर रहने के दौरान ही साल 2005 में उनका निधन हुआ। वह एक बार बम्बई के शेरिफ भी चुने गए थे। 
 
 

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सुनील दत्त और नर्गिस
संजू की लॉन्चिंग और पत्नी का देहांत
शादी के बाद सुनील और नरगिस को तीन बच्चे हुए। जिनके नाम प्रिया, नम्रता और संजय दत्त हैं। 1981 में सुनील दत्त ने अपने बेटे संजय को फिल्म रॉकी से लॉन्च किया।। लेकिन फिल्म की रिलीज से कुछ ही समय पहले ही नरगिस ने दुनिया को अलविदा कह दिया। सुनील दत्त ने नरगिस दत्त मैमोरियल कैंसर फाउंडेशन की स्थापना की और अपनी पत्नी की याद में हर साल अवॉर्ड भी देना शुरू किया। 


 

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sanjay dutt and sunil dutt
बम धमाकों में बेटे का नाम
मां की मृत्यु के बाद से ही संजय दत्त को ड्रग्स की लत लग गई। पर पिता सुनील ने हार नहीं मानी। संजय की नशे की लत को छुड़ाने के लिए जमीन आसमान एक कर दिया। वह संजय को इलाज के लिए अमेरिका के एक नशा मुक्ति केंद्र ले गए। 1993 बम धमाकों में बेटे संजय का नाम आने की वजह से सुनील दत्त काफी तनाव में रहने लगे और इसी दौरान सुनील दत्त ने अपने बेटे को बचाने के लिए शिव सेना नेता बाल ठाकरे की भी मदद ली। 


 
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बॉलीवुड - फोटो : सोशल मीडिया
बेटे के साथ आखिरी फिल्म
सुनील दत्त साल 2001 में खतरनाक दुर्घटना का शिकार हुए। वह धुले से हवाई जहाज से वापसी कर रहे थे, तभी तकनीकी दिक्कतों के चलते जहाज को क्रैश लैंडिंग करनी पड़ी। इस क्रैश लैंडिंग के बाद उन्हें कुछ समय अस्पताल में रखा गया। 2003 में आई फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस इकलौती फिल्म है जिसमें बाप बेटे ने पहली और आखिरी बार स्क्रीन स्पेस शेयर किया। फिल्म रॉकी और क्षत्रिय में भी दोनों थे लेकिन दोनों ने एक साथ एक भी सीन में काम नहीं किया। 
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