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Subrata Roy Bollywood: 250 करोड़ की शादी, संतोषी वेडिंग फोटोग्राफर, अमिताभ ने की अगवानी और मेहमानों में...

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सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय - फोटो : सोशल मीडिया
ये उन दिनों की बात है जब मंदिर और मंडल के मुद्दों से सियासत की हवा बहकने लगी थी। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक ऐसे शख्स ने रंगीन महफिलें सजानी शुरू कीं, जिनमें मुंबई से सितारों की खेप की खेप जाना शुरू हो चुकी थीं। गोरखपुर से ताल्लुक रखने वाले उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के खासमखास समझे जाने वाले इस शख्स का नाम था सुब्रत राय। और, इसने सूबे में कंपनी खोली थी छोटे छोटे व्यापारियों से दैनिक धन संचयन की। स्कीम उसकी बड़ी लुभावनी थीं, बस करना यही था कि एक ग्राहक को अपने साथ कुछ और ग्राहक जोड़ने होते थे और फिर इन ग्राहकों को अपने साथ इसी तरह कुछ और ग्राहक। चेन बनती जाती थी और पैसा लखनऊ पहुंचता जाता था। वीर बहादुर का पेरिस मे संदि्ग्ध परिस्थितियों में निधन हुआ तो सुब्रत राय ने सूबे के नए मुख्यमंत्री बने मुलायम सिंह यादव का दामन थामा।
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सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय - फोटो : सोशल मीडिया

सियासत और सिनेमा का मेल
सुब्रत रॉय सहारा का अखबार जमा। फिर टीवी चैनल जमा और उसके बाद उनका पदार्पण हुआ सिने जगत में। अमिताभ बच्चन उन्हीं दिनों अपनी फिल्मों से दूरी खत्म करके वापस काम पर लौटे थे और उन्होंने पहली बार देश में मिस वर्ल्ड कराने का एलान किया। अमिताभ बच्चन की इसी दौरान खुली कंपनी एबी कॉर्प ने दोनों हाथों से पैसा लुटाया और नतीजा ये हुआ कि वह दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गए। उधर, सियासी चक्र उत्तर में इतनी तेजी से घूम रहा था कि मुलायम सिंह यादव लखनऊ की राजनीति से निकलकर दिल्ली के सूबेदार बन गए और उन्हें रक्षा मंत्री का पद भी मिल गया। और, सुब्रत रात सहारा को इसी दौरान मिले अमर सिंह। सियासत, सिनेमा और सत्ता संतुलन का जो सूत्र अमर सिंह के हाथ लगा, उसने आने वाले दिनों में लखनऊ की तस्वीर बदल दी।

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सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय - फोटो : फाइल फोटो
अमिताभ बच्चन ने की आगवानी
किस ने सोचा होगा कि सदी का महानायक कहलाने वाले अमिताभ बच्चन लखनऊ की एक शाम सहाराश्री कहलाने वाले सुब्रत रॉय की महफिल में आने वाले मेहमानों की आवभगत करते दिखेंगे। उनकी ड्यूटी कुछ यूं लगी थी जैसे किसी मधुशाला में साकी की होती है। अमिताभ बच्चन की आर्थिक हालत उन दिनों खराब थी और वह अमर सिंह पर कुछ इस तरह आश्रित थे कि उन्हें अपनी मौजूदा हालत से निकलने का कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आता था। उन्हीं दिनों अमर सिंह के साथ मिलकर सुब्रत राय ने देश में हवाई सेवा भी शुरू की, सहारा एयरवेज के नाम से। कहने को तो ये सार्वजनिक हवाई यात्रा सेवा थी, लेकिन इसके तमाम जहाज देश के बड़े बड़े नेताओ और फिल्मी सितारों की निजी सेवाओं में लगे रहते। मुंबई से उड़ने वाली चार्टर्ड उड़ानों में फिल्मी सितारों का भर भरकर पहले लखनऊ और फिर सैफई तक जाना शुरू हुआ। उत्तर प्रदेश यहीं से हिंदी सिनेमा के नक्शे पर आया और अमिताभ बच्चन की खासी सक्रियता ने हिंदी सिनेमा के हर बड़े सितारे को इस दौरान यूपी दर्शन कराए। इसका फायदा अमिताभ बच्चन को ये मिला कि जल्द ही वह सहारा की कर्तव्य परिषद के सदस्य बन गए।

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सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय - फोटो : ani
सूबे की सबसे महंगी शादी
मामला यहीं रुका नहीं। देश ने फरवरी 2004 में लखनऊ में तब तक की सबसे महंगी शादी लखनऊ में संपन्न होते देखी। करीब 250 करोड़ रुपये के खर्च के साथ संपन्न हुए सुब्रत रॉय के बेटों सुशांतो और सीमातों की इस शादी के लिए इसनी चार्टर्ड उड़ाने लखनऊ के एयरपोर्ट पर आईं और गईं कि लोग इनकी गिनती करना भूल गए। उन दिनों के दिग्गज फिल्म निर्देशक राजकुमार संतोषी ने इस पूरी शादी की फिल्म बनाई। होटलों की सबसे प्रतिष्ठित चेन ताज समूह के मुख्य शेफ हेमंत ओबेरॉय की ड्यूटी बरातियों के लिए पकवान बनाने पर लगी थी।
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सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय - फोटो : सोशल मीडिया
अटल बिहारी वाजपेयी भी बने बराती
लंदन से खास सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा मंगवाया गया था और मेहमानों की सूची में शामिल थे, तब के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी। इसके पहले जब मुलायम सिंह यादव के बेटे की शादी हुई तो उनका रिसेप्शन भी सहारा शहर में ही हुआ था। सत्ता और कारोबार का ये मेल करीब दो दशक तक निर्विघ्न चला। मामला पहली बार तब बिगड़ना शुरू हुआ जब उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनी और इसकी मुख्यमंत्री मायावती ने सहारा शहर को सीधे निशाने पर लिया। बुलडोजर चलना भी उत्तर प्रदेश की सियासी संस्कृति में तभी से शामिल हुआ जब मायावती के निर्देश पर सहारा शहर का एक बड़ा हिस्सा जमींदोज कर दिया गया था।
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