फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

37 Years Of Karma: अब संस्कृत में गूंजेगा कर्मा का गाना ऐ वतन तेरे लिए, पढ़िए कालजयी फिल्म की मेकिंग के किस्से

विज्ञापन
1 of 10
कर्मा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
8 अगस्त 1986 को रिलीज हुई फिल्म ‘कर्मा’ का एक गाना ‘दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए’ इसके निर्माता निर्देशक सुभाष घई नए सिरे रिलीज करना चाह रहे हैं। वही संगीत, वही गायिका, बस इस बार भाषा संस्कृत है। जी हां, हर राष्ट्रीय पर्व पर पिछले 37 साल से लगातार बजता आ रहा आनंद बक्षी का लिखे और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के स्वरबद्ध किए इस गाने का सुभाष घई ने संस्कृत संस्करण तैयार कर लिया है। गाना बुधवार को यहां मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में रिलीज किया जाना है। फिल्म ‘कर्मा’ की वर्षगांठ से पहले अपने अंधेरी वाले घर पर मिले घई इस गाने को लेकर अब भी उतने ही उत्साहित दिखते हैं, जितने वह फिल्म की रिलीज से पहले इस गाने को जारी करने पर रहे होंगे।
Bigg Boss OTT 2: बिग बॉस ओटीटी 2 में जल्द एंट्री करने वाले हैं गौतम गुलाटी? एक्टर ने सोशल मीडिया पर दिया हिंट
विज्ञापन

2 of 10
सुभाष घई - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सुभाष घई की मल्टीस्टारर फिल्म
बतौर निर्माता ‘कर्मा’ सुभाष घई की दूसरी फिल्म है और बतौर निर्देशक नौवीं। ये फिल्म बनाने के लिए सुभाष घई ने हर फॉर्मूला, हर हथकंडा और हर जुगत आजमाई। फिल्म में इतने सारे सितारे एक साथ लाना आसान नहीं था। निर्माता के तौर पर घई ने साम, दाम, दंड भेद सब अपनाए, और निर्देशक के तौर पर घई ने किस्से, कहानियां, कलाकारी, रंगदारी सब दिखाई और ये फिल्म जैकी श्रॉफ, मीनाक्षी शेषाद्रि व डिंपल कपाड़िया की केतन देसाई निर्देशित फिल्म ‘अल्ला रखा’ से हफ्ता भर पहले रिलीज होकर मैदान मार ले गई।
विज्ञापन

3 of 10
कर्मा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सचिन भौमिक संग रची कहानी
ये उन दिनों की बात है जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके आवास पर ही हत्या कर दी गई थी। और, अपने बालसखा राजीव गांधी का हाथ बंटाने अमिताभ बच्चन राजनीति में चले गए थे। अमिताभ बच्चन ने उन दिनों तमाम फिल्में छोड़ दी थीं। उनमें एक फिल्म सुभाष घई की शामिल थी। ये फिल्म ‘हीरो’ और ‘मेरी जंग’ की रिलीज के बाद शुरू होनी थी। ये फिल्म बंद हुई तो सुभाष घई ने ‘कर्मा’ शुरू की। एक तरह से देखा जाए तो मशहूर पटकथा लेखक सचिन भौमिक के साथ मिलकर सुभाष घई ने रमेश सिप्पी की फिल्म ‘शोले’ का नया संस्करण तैयार कर दिया था। जेल से छूटे बदमाश वहां भी मेन विलेन को पकड़ने निकलते हैं, यहां भी जेल में फांसी की सजा पाए कैदी सीतापुर जेल के जेलर की मदद करने निकलते हैं।

4 of 10
कर्मा में श्रीदेवी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
‘कर्मा’ नाम रखने की वजह
फिल्म का नाम कर्म की बजाय ‘कर्मा’ क्यों रखा गया? ये पूछने पर सुभाष घई कहते हैं, ‘हां, ये बात सही है कि ये फिल्म कर्म की बात ही करती है और इसका सच पूछे तो शीर्षक भी यही होना चाहिए लेकिन एक फिल्मकार अपनी कला को अधिक से अधिक दर्शकों तक पहुंचाने और इसे भव्य व शानदार तरीके से परदे पर प्रस्तुत करने के लिए कुछ सिनेमाई छूट भी चाहता है। मैंने भी ये छूट ली और फिल्म का नाम ‘कर्मा’ रखा। ये कुछ वैसे ही जैसे क्लाइमेक्स में जब डॉ. डैंग पर गोलियां चलती है तो उसके पीछे दिख रहे भारत के नक्शे को आंच तक नहीं आती। तो ऐसा होता है फिल्मों में।’
विज्ञापन

5 of 10
कर्मा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
जलवा जैकी श्रॉफ का
फिल्म ‘कर्मा’ में जैकी श्रॉफ की भी मुख्य भूमिका थी और उन्हीं दिनों अमिताभ बच्चन ने एक फिल्म निर्माता मनमोहन देसाई की छोड़ी थी, ‘अल्लारखा’। इस फिल्म से मनमोहन देसाई के बेटे केतन ने बतौर डायरेक्टर अपना डेब्यू किया। अमिताभ बच्चन की सिफारिश पर ही मनमोहन देसाई ने ‘अल्लारखा’ में अमिताभ के लिए लिखा लीड रोल जैकी श्रॉफ को दिया। फिल्म की शूटिंग जल्द से जल्द पूरी करने के लिए उन्हें मुंहमांगी फीस भी दी गई। इधर, सुभाष घई को लगा कि कहीं ऐसा न हो कि उनका ही बनाया हीरो उनके हाथ से निकल जाए। ‘कर्मा’ और ‘अल्लारखा’ की शूटिंग साथ चल रही थी। दोनों फिल्मे पहले तो एक ही दिन रिलीज वाली थीं। लेकिन, फिर मनमोहन देसाई और सुभाष घई ने बैठक की और रिलीज में एक हफ्ते का अंतर तय किया।
विज्ञापन

6 of 10
कर्मा का पोस्टर, सुभाष घई - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
शोमैन कहलाना पसंद नहीं करते घई
सुभाष घई के ये वो दिन थे, जब उन्हें पारस पत्थर समझा जाता था, जिस कलाकार को वह हाथ लगा देते वह सुपरस्टार हो जाता। ‘कालीचरण’ और ‘विश्वनाथ’ उनकी हिट फिल्में थीं। ‘कर्ज’ और ‘गौतम गोविंदा’ ने भी अच्छा नाम कमाया। ‘विधाता’, ‘हीरो’ और ‘मेरी जंग’ की हैट्रिक ने उनका नाम नए शो मैन के रूप में चर्चित कर दिया। हालांकि वह कहते हैं, ‘मेरे नाम के आगे शोमैन शब्द लगता है तो मैं खुद को एक दायरे में बंधा महसूस करता हूं। मैं एक फिल्मकार के तौर ही अधिक आजादी महसूस करता हूं।’
विज्ञापन

7 of 10
कर्मा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
यूं मिला फिल्म में पूनम ढिल्लों को मौका
फिल्म ‘कर्मा’ में जैकी श्रॉफ और अनिल कपूर के लिए सुभाष घई जब हीरोइनें तलाश रहे थे तो श्रीदेवी का नाम तो तुरंत फाइनल हो गया लेकिन अनिल कपूर के साथ पूनम ढिल्लों को लाने का भी एक किस्सा है। इस रोल के लिए सुभाष घई का बड़ा मन था तब्बू की बहन फराह नाज को लेने का। फरहा नाज तब यशराज फिल्म्स के करार में बंधी थी और यश चोपड़ा ने तब घई के चाहने पर भी उन्हें अपनी फिल्म ‘फासले’ के रशेज दिखाने से इंकार कर दिया। घई इस रोल के लिए गांव की गोरी सी दिखने वाली एक लड़की लेना चाहते थे। ये बात पूनम को पता चली तो वह खुद जाकर सुभाष घई से मिलीं और उन्हें फिल्म मिल गई।
Haddi: नवाजुद्दीन के फैंस के लिए बुरी खबर, थिएटर नहीं ओटीटी पर दस्तक देगी 'हड्डी', जानें कहां होगी रिलीज

8 of 10
कर्मा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कालजयी किरदार बना डॉ. डैंग
हिंदी सिनेमा में खलनायकों के कुछ ही किरदार हुए हैं जिनके नाम लोगों को दशकों बाद भी याद रहे, जैसे कि गब्बर सिंह, डॉक्टर डैंग और मोगैम्बो। फिल्म ‘कर्मा’ में अनुपम खेर ने डॉक्टर डैंग का रोल किया है, हालांकि पहले ये रोल अमरीश पुरी के हिसाब से गढ़ा गया था। इस बारे में बात चलने पर अनुपम बताते हैं, ‘मेरी उस दिन सुबह सात बजे की शिफ्ट थी तो मैं मेकअप वगैरह करके दाढ़ी लगाकर रेडी था। कोई 11 बजे दिलीप साब आए। आते ही सुभाष घई से बोले, अरे भई कुछ चाय वगैरह मिलेगी क्या? मैं दिलीप कुमार को सामने देख हतप्रभ। सुभाष घई ने ये देखा तो मुझे उठाकर एक कोने में ले गए और बोले, ये क्या कर रहे हो। इतना प्रभावित हो जाओगे तो कैमरे के सामने सामना कैसे करोगे? मैंने तब अपने अभिनय की तालीम में सीखा गया वाक्य उनके सामने दोहराया, अभी अनुपम खेर जो है वह दिलीप कुमार को देख रहा है। कैमरा ऑन होगा तो राणा विश्व प्रताप सिंह को डॉक्टर डैंग देखेगा। आप चिंता मत करिए।’

9 of 10
कर्मा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कादर खान के संवादों का कमाल
फिल्म ‘कर्मा’ में नसीरुद्दीन शाह वाला रोल बताते हैं कि पहले रजनीकांत करने वाले थे, सुभाष घई ने ये रोल लिखा भी उन्हीं के हिसाब से था। लेकिन, अनिल कपूर और उनके बड़े भाई बोनी की पैरवी पर नसीरुद्दीन शाह की इस फिल्म में एंट्री हुई। लेकिन, इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह और दिलीप कुमार के जितने सीन ये फिल्म देखते हुए एक साथ के नजर आते हैं, उनमें से फिल्म का सबसे अहम सीन जिसमें दोनों के बीच खूब डायलॉगबाजी थी, उसे सुभाष घई ने अलग अलग शूट किया है। फिल्म ‘कर्मा’ के संवाद कादर खान ने लिखे हैं। अपने लेखकों के साथ सुभाष घई का करीब का रिश्ता रहा है। राम केलकर से लेकर कादर खान तक हर लेखक उनकी सिनेमाई समझ का मुरीद रहा।
विज्ञापन

10 of 10
कर्मा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
चलते चलते...
हास्य कलाकार मुकरी और दिलीप कुमार का फिल्मों में लंबा साथ रहा है। दोनों की जोड़ी बाद में कम ही साथ दिखी और ‘कर्मा’ में मुकरी का छोटे खान वाला रोल लोगों के लिए यादगार बन गया। फिल्म तकनीकी रूप से भी बहुत समृद्ध फिल्म रही। फिल्म में आनंद बक्षी के लिखे सारे गाने हिट रहे और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का संगीत सुपरहिट। दिलीप कुमार और नूतन ने पहली बार इस फिल्म में साथ काम किया और दोनों की केमिस्ट्री क्या खूब रही परदे पर। फिल्म के पहले गाने की बात मैंने इस आलेख की शुरुआत में की थी, ‘हर करम अपना करेंगे ऐ वतन तेरे लिए’। ये गाना अब संस्कृत में रिलीज होने जा रहा है और संस्कृत में भी इसे गाया कविता कृष्णमूर्ति ने ही है।

(यह आलेख बौद्धिक संपदा अधिकारों के तहत संरक्षित है)
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें