फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राष्ट्रगान के अपमान में फंसे थे ये बॉलीवुड स्टार, एक एक्ट्रेस तो मजबूरन खड़ी भी न हो पाई

Sat, 26 Jan 2019 05:10 AM IST
विजय जैन एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 5
flag - फोटो : अमर उजाला
राष्टगान 'जन-गण-मन' देश के सम्मान में गाया जाने वाला मात्र एक गीत ही नहीं है बल्कि हर हिंदुस्तानी की रग-रग में स्फूर्ति भरने वाला भारत की आजादी का एक अभिन्न हिस्सा है। इसका सम्मान करना और इसके सम्मान की रक्षा करना हर भारतीय नागरिक का कर्तव्य है। लेकिन राष्ट्रगान के अपमान के चलते कुछ बॉलीवुड स्टार्स इसमें फंसते नजर आए थे.. तो आइए जानते हैं इनके बारे में..
विज्ञापन

2 of 5
amitabh bachchan
सबसे पहले बात करेंगे सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की। बता दें कि उनके खिलाफ राष्ट्रगान को गलत तरीके से गाने पर मामला दर्ज हुआ था। दरअसल भारत और पाकिस्तान के बीच कोलकाता के ईडन गार्डन में हुए वर्ल्ड टी 20 मैच से पहले राष्ट्रगान गाया गया था। ऐसे में दिल्ली के एक थाने में अमिताभ के खिलाफ एक शिकायतकर्ता ने ये आरोप लगाया था कि बिग बी ने राष्ट्रगान को खत्म करने में 1 मिनट 10 सेकेंड का समय लिया, जबकि नियम के अनुसार ये 52 सेकेंड का है। 
विज्ञापन

3 of 5
फाइल फोटो
वहीं, टीवी एक्टर कुशाल टंडन और बॉलीवुड एक्ट्रेस अमीषा पटेल के बीच ट्विटर पर वार छिड़ गया। साल 2015 में कुशाल ने अमीषा पर फिल्म शुरू होने से पहले चले राष्ट्रगान पर खड़े ना होने के चलते आरोप लगाया था। इसके बाद अमीषा ने यह कहकर कुशाल की बोलती बंद कर दी थी कि वो उस दौरान पीरियड से गुजर रही थीं इसलिए कपड़े खराब होने के डर से वह खड़ी नहीं हो सकी। 

4 of 5
Indian Flag
कानूनी तौर पर देखा जाए तो 'प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट' 1971 की धारा तीन के मुताबिक, राष्ट्रगान में विघ्न डालना या गाने से रोकने वाले को सजा के तौर पर 3 साल तक की कैद और जुर्माना दोनों हो सकता है, लेकिन इसका एक अपवाद यह है कि किसी को राष्ट्रगान गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।बेशक इस दौरान भारतीयों से उम्मीद की जाती है कि वो राष्ट्रगान के समय सावधान की मुद्रा में खड़े रहें, लेकिन ये कहना गलत होगा कि जन-गण-मन न गाना इसका अपमान है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
flag
अगर राष्ट्रगान के इतिहास की बात करें तो बता दें कि संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 इसे अपनाया था और सबसे पहले 27 दिसंबर 1911 को कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में इसे गाया गया था। इसे नोबेल पुरस्कार विजेता और भारतीय साहित्यकार रवीन्द्रनाथ टैगोर ने सबसे पहले बंगाली भाषा में लिखा था। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें