साथियों से झगड़े हुए, टीवी शो की रेटिंग गिरी, आलोचना हुई, मगर बात हाथ से कैसे निकली?
रेटिंग गिरती-उठती रहती है। शो मैंने बंद किया। चैनल ने नहीं कहा। मैं सेंसेटिव हूं। लोगों को लगता है कि मैं हंसा रहा हूं पर कभी-कभी छोटी-छोटी चीजें दिल को लग जाती हैं। बहुत सोचा क्यों हुआ, कैसे हुआ? नहीं होना चाहिए था। ऊपर से खबरें पढ़ीं, इतनी नेगेटिव थीं कि पता नहीं मैंने क्या कर दिया! कभी दो दोस्तों में, परिवार में झगड़ा हो जाता है लेकिन क्या-क्या लिख डाला लोगों ने। बिना जाने-परखे कुछ भी छाप डाला।
इस छपने को आपने बहुत सीरियसली लिया?
मैं 'इंट्रोवर्ट' हूं। सोचता रहा कि छापने दो, कितना छापेंगे। मैं अपना काम करता हूं। मेरा कोई पीआर-मैनेजर नहीं है। मैंने किसी से कुछ नहीं कहा। इससे खाना बंद हो गया। पीना शुरू हो गया। बस, हालत खराब हो गई। काम पर असर पड़ा। जब शो के शूट बंद होने लगे, तो मुझे लगा कि अब और ऐसी खबरें आएंगी, इससे अच्छा है ब्रेक ले लो। इस बीच अच्छा यह रहा कि 'फिरंगी' पूरी हो चुकी थी।