एसएस राजामौली की फिल्म 'बाहुबली' और 'बाहुबली 2' ने भारतीय सिनेमा में इतिहास रच दिया। बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड तोड़ने के अलावा ये दोनों फिल्में अपने स्पेशल इफेक्ट्स और भव्य सेट को लेकर भी चर्चा में रहीं । आज 'बाहुबलीः द बिगनिंग' को रिलीज हुए 4 साल पूरे हो चुके हैं । इस मौके पर आपको बताते हैं कि इतनी बड़ी फिल्म को बनाने के लिए मेकर्स को किस-किस तरह के जुगाड़ करने पड़े । एक इंटरव्यू में मेकर्स ने खुद इन जुगाड़ों का जिक्र किया था ।
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'बाहुबली' का हर सीन लाजवाब था । इसमें कोई भी खामी निकालना बहुत मुश्किल है । फिल्म के शरुआत में ही एक सीन था जिसमें बाहुबली 1000 फीट झरने पर चढ़ने की कोशिश करते हैं । इस झरने के बारे में मेकर्स ने बताया था कि वाटरफॉल के इस सीन को टिशू पेपर की सहायता से शूट किया गया था। टिशू पेपर को लंबे साइज में काटकर पानी की तरह मशीन से गिराया गया।
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- फोटो : self
वहीं प्रभास ने पहाड़ पर चढ़ने की ट्रेनिंग ली थी । साथ ही फिल्म के कुछ सीन केरला के झरने पर भी फिल्माए गए । इसके अलावा बर्फ के बुरादे के लिए भी टिशू पेपर का ही इस्तेमाल किया गया था। फिल्म में माहिष्मति किंगडम की भी बहुत चर्चा हुई । यह किसी भी फिल्म के लिए बनाए गए सेट से सबसे ऊंचा है। इससे फिल्म की भव्यता और भी बढ़ गई । ये सेट पेरिस के एफिल टॉवर के बराबर था।
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राजस्थान के दो मंदिरों में रिसर्च कर इसकी नक्काशी की गई थी। माहिष्मति पैलेस के सेट को बनाने के लिए 1900 लोगों ने 100 दिन तक लगातार काम किया। फिल्म के पहले भाग में भल्लाल देव का रथ तो आपको याद ही होगा। इसमें 4 ब्लेड लगाए गए थे। टीम को इसका विचार किसानों की धान काटने की मशीन को देखकर आया था। इसे चलाने के लिए एक लाख रुपए की बुलेट खरीदी गई और उसके इंजन को रथ में फिट किया गया था।
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सत्याराज 'कटप्पा' को सीन समझाते निर्देशक एस एस राजामौली
बाहुबली सिरीज के लिए पूरा क्रू मेंबर सुबह 3.30 बजे उठकर शूटिंग शुरू कर देता है। ऐसा क्रू ने पांच साल तक किया। फिल्म के युद्ध सीन में टेक्नोलॉजी का जबरदस्त इस्तेमाल किया गया है। फिल्म में क्लाइमैक्स शूट करना सबसे मुश्किल था। 2 मिनट के सीन की शूटिंग में करीब 100 दिन लगे थे।
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माहिष्मति किंगडम में लगे भल्लालदेव के स्टैच्यू का वजन 400 किलो था । इसे करीब 400 लोगों की टीम ने बनाया था । इसे 4 अलग-अलग हिस्सों में तैयार किया गया। जिसमें करीब 1 महीने का समय लगा था। मूवी के क्रू मेंबर्स को भल्लालदेव की मूर्ति लगाने का आइडिया ग्रीस के कोलोस्सस ऑफ रोहड्स को देखकर आया था।
युद्ध के समय सेट पर 1500 सैनिक मौजूद थे। लेकिन 3 डी की तकनीक से इन्हें सवा लाख सैनिकों में बदल दिया गया। क्लाइमैक्स का यह सीन भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा क्रोमा सीन है। इसमें एल शेप का ग्रीन पर्दा इस्तेमाल हुआ था।