फिल्म ओम शांति ओम का पप्पू मास्टर हिंदी पट्टी के दर्शकों के बीच इकबाल और डोर जैसी फिल्मों में अपनी दमदार अदाकारी के लिए भी जाना जाता है। मराठी टेलीविजन और सिनेमा से निकलकर हिंदी सिनेमा में अपनी ठोस पहचान बनाने वाले ये अभिनेता है श्रेयस तलपडे। डिजनी की फिल्म द लॉयन किंग में श्रेयस ने टिमोन के किरदार को आवाज दी है।
लोग द लॉयन किंग देखने जाते हैं शाहरुख खान और आर्यन खान की आवाजों के मोह में और हॉल से निकलते हैं पुम्बा और टिमोन की आवाजों के बारे में बातें करते हुए, क्या कहना चाहेंगे इस नई पहचान के बारे में?
द लॉयन किंग में टिमोन, पुंबा और जाजू के किरदार बेहद ही अच्छे हैं, मददगार हैं और बच्चों का ख्याल रखते हैं। यह फिल्म भले ही बच्चों की भावुक फिल्म हो लेकिन इसकी कहानी बेहद उम्दा है। जब स्कार राजा बनता है और माहौल गमजदा होता है तो सिंबा का सहारा बनते हैं टिमोन और पुंबा। मैं अपनी आवाज को खास क्रेडिट इसलिए भी नहीं देना चाहता क्योंकि ये फिल्म अपनी कहानी की वजह से इतनी तगड़ी कमाई कर रही है।
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the lion king
- फोटो : social media
इकबाल जैसी फिल्म अब जब देखते हैं तो जेहन में क्या आता है? क्या दोबारा कभी उस तरह के किरदार में आपको देख पाएंगे?
जब हमने वह फिल्म बनाई तो सोचा नहीं था कि फिल्म को ऐसा रिस्पॉन्स मिलेगा। पहली फिल्म पहली फिल्म ही होती है। उस तरह का जादू कोई भी कलाकार दोबारा नहीं कर पाता है। पहले मैं हर स्क्रिप्ट की तुलना इकबाल की पटकथा से किया करता फिर एक वक्त के बाद मैने ऐसा करना छोड़ दिया, क्योंकि अगर हर वक्त मैं ऐसे ही तुलना करते रहूंगा तो नए किरदारों के साथ इंसाफ नहीं कर पाऊंगा। इकबाल जैसी फिल्म किसी भी कलाकार की ज़िंदगी में सिर्फ एक बार होती हैं।
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Shreyas Talpade
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तो इंडस्ट्री में अपने अभी तक के काम को लेकर संतुष्ट हैं?
स्पष्ट रूप से कहूं तो पूरी तरह से संतुष्ट तो नहीं हूं। और भी बहुत कुछ है जो मुझे अभी करना है। मैं फिल्मी पृष्ठभूमि से नहीं हूं। मेरे जैसे व्यक्ति अपनी गलतियों से सबक लेते रहते हैं। फिल्म इंडस्ट्री के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि यहां कभी किसी के लिए देर नहीं होती। जब तक आप अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए तैयार हैं, काम आता रहेगा। लायन किंग को ही देख लीजिए। मैने कभी नहीं सोचा था कि मैं टिमोन का किरदार करूंगा या फिर कभी हकूना मटाटा गाऊंगा।
फिल्म सेटर्स में आपने पहली बार एक विलेन का किरदार निभाया, कैसा रहा इस किरदार का अनुभव ?
फिल्म के निर्देशक अश्विनी जी ने जब मुझे कहानी सुनाई थी तो मेरा रोल क्या होगा, ये नहीं बाता। पूरी कहानी सुनने के दौरान मुझे यही लगता रहा कि मैं पुलिसवाले की भूमिका निभाने जा रहा हूं। जैसे ही कहानी सुनाना उन्होंनें बंद किया तो उन्होंने बताया कि मेरा किरदार विलेन का है। मैं एक सेकेंड के लिए हिल सा गया क्योंकि आज तक कभी किसी फिल्मकार ने मुझे ऐसा किरदार नहीं दिया था। पर अब मुझे पता चल गया है कि मैं यह भी कर सकता हूं। अब मैं खुद को चुनौती देने लायक बन गया हूं।