बेटे अवनीश के साथ सूरज बड़जात्या
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अब तो आपका बेटा अवनीश भी निर्देशक बन चुका है। अपनी अगली पीढ़ी को क्या क्या सिखाते हैं, कि ये नहीं करना है सिनेमा में?
उसको मैंने बस मूल बातें ही सिखाईं, खासतौर से लेखन में और ये भी कि अपनी तुलना मुझसे न करे। ये इसलिए कि मैं 22 साल में निर्देशक बन गया और वह 30 साल में अपनी शुरुआत कर रहा है, तो इसकी तुलना करेगा, वह ठीक नहीं है। हमारे जमाने में दसवीं पास होते ही लड़के को काम शुरू करना होता था। अब शिक्षा पूरी करना बहुत जरूरी है। हिट, फ्लॉप, सपने सब होंगे, बस ये बात दिमाग में बिठाकर रखनी है कि राजश्री के जो संस्कार हैं, उन्हें नहीं भूलना है। मैं बहुत खुश हूं कि उसने अपनी पहली पिक्चर जो बनाई, वह उसने अपने हिसाब से बनाई। कहीं से मेरा कुछ लिया और ये तो जिंदगी है, उतार चढ़ाव आते ही रहेंगे।