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Sooraj Barjatya Interview: मैं कम बोलता हूं लेकिन मैं देखता बहुत हूं, पढ़ता बहुत हूं, बेहतर पिता बनने की कोशिश

सार

राजश्री की पहली वेब सीरीज ‘बड़ा नाम करेंगे’ सोनी लिव पर खूब पसंद की जा रही है। लेकिन, क्या आपको पता है कि राजश्री को ओटीटी पर आने में इतना वक्त क्यों लगा? बता रहे हैं खुद सूरज बड़जात्या।
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सूरज बड़जात्या - फोटो : अमर उजाला

राजश्री का नाम हिंदी सिनेमा में पारिवारिक मनोरंजन की गारंटी है। राजश्री की पहली वेब सीरीज ‘बड़ा नाम करेंगे’ सोनी लिव पर खूब पसंद की जा रही है। लेकिन, क्या आपको पता है कि राजश्री को ओटीटी पर आने में इतना वक्त क्यों लगा? बता रहे हैं खुद सूरज बड़जात्या, ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल को इस खास मुलाकात में।

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बड़ा नाम करेंगे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

बदलते दौर के साथ कदमताल करने के लिए पहचाने जाने वाले राजश्री प्रोडक्शंस ने पहली बार ओटीटी के लिए कुछ बनाया है, क्या कहेंगे इस नई शुरुआत के बारे में?
हम बहुत पहले से सोच रहे थे कि हम ओटीटी पर आएंगे और कई जगह बात भी हुई पर सबका ये कहना था कि राजश्री जिस तरह की पारिवारिक कहानियां बनाते हैं, उसके लिए शायद ओटीटी पर समय आया नहीं है। लेकिन, सोनी लिव ने इसके लिए हमसे खुद संपर्क किया और कहा कि हमें राजश्री की वह दुनिया अपने ओटीटी दर्शकों को दिखानी है, जो उन्होंने ‘विवाह’ और ‘हम साथ साथ हैं’ जैसी फिल्मों में देखी है।

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बड़ा नाम करेंगे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

इस बात ने तो आपका हौसला दूना कर दिया होगा?
हां, इस न्यौते ने हमारा आत्मविश्वास बहुत बढ़ाया। हम जोश में थे कि कुछ अच्छा करें। वेब सीरीज ‘बड़ा नाम करेंगे’ की कहानी हमारे पास 2013 से थी। एस मनस्वी ने इसे लिखा है और ये कहानी रतलाम और उज्जैन जैसे दो छोटे शहरों की कहानी है, एक बेटा है और एक बेटी है, जो मुंबई में कुछ बड़ा करना चाहते हैं। सीरीज का निर्देशन ‘गुल्लक’ के दो सीजन निर्देशित कर चुके पलाश वासवानी ने किया है।

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सूरज बड़जात्या - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

तो इस कहानी में भी सपनों और संस्कारों की बात है?
हां, नई पीढ़ी के बच्चों के बड़े सपने हैं और उसमें ये भी फिट करना है कि जहां से ये लोग आते हैं, वहां अब भी एकादशी का व्रत रखा जाता है। जहां अब भी हनुमान चालीसा पढ़ने को कहा जाता है। इन दो धाराओं के बीच एक लड़का और एक लड़की की मोहब्बत है और कैसे वह अपनी दुनिया में संतुलन बनाकर चलते हैं।

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बड़ा नाम करेंगे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

जिस तरह की कहानियां आप बनाते हैं, उसके लिए आप अपने परिवार से कितनी चर्चा करते हैं?
मैं परिवार के साथ जब चर्चा करता हूं, खासतौर से बच्चों के साथ तो उनको कई चीजें समझ में नहीं आती हैं। पर, साथ में मुझे भी एक नया दृष्टिकोण मिलता है। जैसे, आजकल के बच्चे क्यों बहुत पूछते हैं और ये ठीक भी हैं। हालांकि, जिस तरह से इस शो में बेटी के पिता अपने बच्चों से आसानी से बात करते दिखते हैं, उतनी सहजता शायद मुझमें नहीं है लेकिन मेरी पत्नी ने ये शो देखा तो उनको इनमें से बहुत से किरदार अपने रिश्तेदारों जैसे लगे। जहां तक मेरी बात है तो मैं अब भी अपनी बेटी के ‘क्यों’ के उत्तर देकर, एक बेहतर पिता बनने की कोशिश में हूं।

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सलमान खान और आलोक नाथ के साथ निर्देशक सूरज बड़जात्या - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

आपकी पहली फिल्म मैंने प्यार किया में रईस के पैसों और गरीब के आत्मसम्मान का टकराव है, इस बार इस शो में भी वैसा ही कुछ दिख रहा है। आप अपनी कहानियां कहां से चुनते हैं?
मैं कम बोलता हूं लेकिन मैं देखता बहुत हूं, पढ़ता बहुत हूं। अखबार, किताबें और अपने आसपास, मैं सब देखता हूं। फिर उसमें से मैं छांटता हूं। मेरा एक लालच रहता है कि एक आदर्श दुनिया बन सके। ‘अमर उजाला’ की खबर पर हमने ‘विवाह’ बनाई। अब, इस शो में हमने दिखाया है कि संतोष कितना जरूरी है। फिल्म हो या ओटीटी, हम हमेशा चाहते हैं कि अच्छाइयों की जीत हो।

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बेटे अवनीश के साथ सूरज बड़जात्या - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अब तो आपका बेटा अवनीश भी निर्देशक बन चुका है। अपनी अगली पीढ़ी को क्या क्या सिखाते हैं, कि ये नहीं करना है सिनेमा में?
उसको मैंने बस मूल बातें ही सिखाईं, खासतौर से लेखन में और ये भी कि अपनी तुलना मुझसे न करे। ये इसलिए कि मैं 22 साल में निर्देशक बन गया और वह 30 साल में अपनी शुरुआत कर रहा है, तो इसकी तुलना करेगा, वह ठीक नहीं है। हमारे जमाने में दसवीं पास होते ही लड़के को काम शुरू करना होता था। अब शिक्षा पूरी करना बहुत जरूरी है। हिट, फ्लॉप, सपने सब होंगे, बस ये बात दिमाग में बिठाकर रखनी है कि राजश्री के जो संस्कार हैं, उन्हें नहीं भूलना है। मैं बहुत खुश हूं कि उसने अपनी पहली पिक्चर जो बनाई, वह उसने अपने हिसाब से बनाई। कहीं से मेरा कुछ लिया और ये तो जिंदगी है, उतार चढ़ाव आते ही रहेंगे।

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ऊंचाई - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपकी फिल्मों की यूएसपी किरदारों की सहजता माना जाता है, इसके बारे में क्या कहेंगे?
मैं यही कहना चाहूंगा कि हमारे मूल्य और हमारी संवेदनाएं वही हैं जो फिल्मों में रहीं, वही ओटीटी पर हैं। सरलता और सहजता हमारी पहचान है। अभी हम फिल्म ‘ऊंचाई’ की शूटिंग कर रहे थे तो अमिताभ बच्चन भी कह रहे थे कि सूरज, तुम्हारी फिल्मों में साधारण सी चीजें भी अच्छी लगती हैं। 
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प्रेम रतन धन पायो में सलमान खान और सोनम कपूर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, बड़े परदे पर प्रेम की वापसी का लोगों को बहुत इंतजार रहा है, उसका एलान आप कब करने वाले हैं?
अभी तक तो हम सब ‘बड़ा नाम करेंगे’ में ही व्यस्त रहे। अब हम इस फिल्म का एलान करेंगे। बहुत जल्द एक बड़ा एलान आने वाला है।

सूरज बड़जात्या से इस बातचीत का वीडियो आप यहां देख सकते हैं
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