क्या हर सिख इंदिरा गांधी का हत्यारा, क्या हर सिख पाकिस्तान का एजेंट है? ये सवाल उस सिख का है, जो अपनी जान बचाने के लिए इधर से उधर छुपता फिर रहा है। उसका कोई दोष नहीं लेकिन सब उसकी जान लेना चाहते हैं, उसके बच्चों को मार देना चाहते हैं। क्यों? हम बताते हैं आपको पूरी कहानी...
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क्या हर सिख पाकिस्तान का एजेंट है?
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31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके आवास पर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई। खबर आई मारने वाला उनका सिख बॉडीगार्ड था और फिर जिधर देखो सिखों के खिलाफ दंगे शुरू हो गए। सिखों के कत्लो-गारत से डरे एक सिख पति-पत्नी अपने घर में कैद हैं। डर बढ़ता जा रहा है ना जाने कब दंगाई यहां पहुंच जाएंगे।
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बुरी तरह डरा ये सिख परिवार हर तरफ फोन करके मदद मांग रहा है लेकिन कोई मदद को तैयार नहीं है। तभी दरवाजे पर आवाज होती है। खिड़की से साफ दिख रहा है कि दंगाइयों की भीड़ हाथों में हथियारों के साथ टूट पड़ने को तैयार है। बाहर से एक आवाज आती है 'अन्दर कोई सिख है?'
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ये परिवार जान बचाने को इधर से उधर भागता है, लेकिन जान कैसे बचे, जगह-जगह दंगाई हैं। कुछ लोग इस भीड़ को भड़का रहे हैं कि 'प्रधानमंत्री पर चली एक-एक गोली का बदला लिया जाएगा'। ऐसे में कैसे बचेगी तमाम बेगुनाहों की जान?
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जान बचाते सिख समुदाय का हर शख्स यही पूछ रहा है कि क्या हर सिख पाकिस्तान का एजेंट और इंदिरा गांधी का हत्यारा है?
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क्या हर सिख पाकिस्तान का एजेंट है?
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यही कहानी है, 31 अक्टूबर को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देशभर में सिख विरोधी दंगो की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म '31 अक्टूबर' की। फिल्म 7 अक्टूबर को रिलीज होगी। ट्रेलर अगली स्लाइड में।