संजना संघी
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करियर को लेकर कन्फ्यूजन
संजना संघी दिल्ली की एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं। बड़े भाई गूगल में नौकरी करते हैं और दादा साउथ दिल्ली में डॉक्टर हैं। नाना का चांदनी चौक में मोती सिनेमा के नाम से थियेटर है और माता पिता कारोबारी हैं। संजना कहती हैं, ‘नाना जी हर शनिवार को मुझे फिल्में दिखाने ले जाते थे, उन दिनों मैने राज कपूर और नरगिस की फिल्में खूब देखी। थोड़ा होश संभाला तो ‘कयामत से कयामत तक’, ‘रंग दे बसंती’, ‘दिल चाहता है’ जैसी फिल्में खूब देखती थी। 'दिल चाहता है' देखकर मैं बहुत प्रभावित हुई। 'सोल्जर' जब रिलीज हुई तो हमेशा उसके गाने गुनगुनाती थी। कहीं न कहीं मेरे अंदर एक कलाकार जन्म ले चुका था लेकिन समझ में नहीं आ रहा था कि आगे क्या करना है?’