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'दो गज जमीन के नीचे' से शुरू हुआ था रामसे ब्रदर्स के बनाए खौफ का सफर

Wed, 18 Sep 2019 06:39 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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रामसे ब्रदर्स - फोटो : social media
70 और 80 के दशक में जब हर तरफ रोमांटिक फिल्में बन रही थीं उस वक्त एक नाम हॉरर फिल्मों के लिए मशहूर हुआ। ये नाम था रामसे ब्रदर्स का। यह वो दौर था, जब अमिताभ बच्चन बतौर एंग्री यंगमैन हिंदी सिनेमा में स्थापित हो रहे थे। एक्शन और रोमांटिक फिल्मों का बोलबाला था लेकिन दर्शकों को कुछ नए की तलाश थी। उस वक्त रामसे ब्रदर्स ने चांस लिया और हिंदी सिनेमा को मिली भूत, प्रेत, आत्मा और शैतान की कहानियां। ये वो फिल्में थी जिसे देखने लोग थियेटर में लंबी लाइन लगाकर भी जाया करते थे। डर के बावजूद रामसे ब्रदर्स की फिल्मों की टिकटें मिनटों में बिक जाया करती थीं। इनकी फिल्में इतनी डरावनी होती थीं कि देखने वाले लोग थिएटरों में ही बेहोश हो जाते थे लेकिन बावजूद इसके फिल्में देखने जाते थे। रामसे ब्रदर्स की फिल्मों में हॉरर के साथ-साथ होता था बिकिनी और नाइटी पहनने वाली हीरोइन का अंग प्रदर्शन। इसी के चलते फिल्मों को दर्शकों की कमी नहीं होती थी।
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रामसे ब्रदर्स - फोटो : SCHOKKENDNIEUWS.NL
ऐसे चढ़ा हॉरर का भूत
रामसे ब्रदर्स की बायोग्राफी Don't Disturb The Dead- The Story Of the Ramsay Brothers के अनुसार, उनका परिवार 1947 में पार्टिशन के बाद मुंबई आ गया था। यहां आकर रामसे बंधुओं के पिता ने मुंबई में पहले इलेक्ट्रॉनिक की दुकान खोली थी, लेकिन हिंदी सिनेमा के ग्लैमर ने उन्हें अपनी ओर खींच लिया। इसके बाद सातों भाईयों ने अपने पिता के कदम से कदम मिलाते हुए फिल्में बनाने का काम शुरू किया। लेकिन रामसे बंधुओं में से तुलसी और श्याम ने हॉरर फिल्मों में दिलचस्पी दिखाई और हॉलीवुड की कॉपी करते हुए इंडियन मसाला शामिल करके भूतिया फिल्में बनानी शुरू की। इन दोनों ने मिलकर हॉरर फिल्मों का एक जबरदस्त ट्रेंड शुरू किया।
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दो गज जमीन के नीचे - फोटो : Social Media
'दो गज जमीन के नीचे' से हुई शुरूआत
रामसे ब्रदर्स के निर्देशन में बनी पहली हॉरर फिल्म थी 1972 में आई 'दो गज जमीन के नीचे'।  जाहिर है एक्शन और रोमांटिक फिल्मों से उब चुके दर्शकों को कुछ नया मिला था। फिल्म चल पड़ी। इस फिल्म को अकेले देखने वाले को इनाम में 1000 रुपये दिए जाने की बात कही गई थी। इसके बाद रामसे ब्रदर्स ने मिलकर एक से बढ़कर एक हॉरर फिल्मों का निर्माण किया। 1994 में उन्होंने अपनी आखिरी बड़ी फिल्म 'महाकाल' बनाई। बी ग्रेड हॉरर फिल्मों के बाद वह फिल्मों पर फिल्में बनाते रहे। इसके बाद टीवी का रुख किया। जी हॉरर शो, आहट, श्श्श्श्श् कोई है जैसे इन धारावाहिकों में छोटी छोटी कहानियां दिखाई जाती थी लेकिन आलम ये था कि इस धारावाहिकों से लोग इतना डर गए थे कि इसके निर्माता को लोगों ने चिट्ठियां लिख कर कहा था कि इसे रात नहीं दिन के समय प्रसारित किया जाए क्योंकि आहट देखने के बाद उन्हें नींद नहीं आती है।

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वीराना - फोटो : social media
एक फिल्म में आपको सबकुछ देना होता है
साल 2014 में फिल्मी पत्रिका स्टारडस्ट को दिए एक इंटरव्यू में तुलसी ने कहा था, 'लोग खाने के लिए एक पूरी थाली चाहते हैं। एक फिल्म में आपको सब कुछ देना होता है, थोड़ा सा एक्शन, रोमांस, गाना और सेक्स सीन भी। आप पूरी तरह से एक डार्क फिल्म नहीं बना सकते हैं। दर्शकों को डर से थोड़ी देर के लिए राहत भी देने की जरूरत होती है और अगर आपने रामसे ब्रदर्स की फिल्में देखी होंगी तो आपको उनकी फिल्मों में ये सब मिलेगा। श्याम रामसे मानते थे कि अपनी फिल्मों में वो सेक्स अपील इसलिए रखते हैं ताकि लोग रिलैक्स फील करें।
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Bandh Darwaza - फोटो : social media
दर्शकों को डराने में हुए कामयाब
ऐसे दौर में जब दर्शकों को डराने के लिए स्पेशल इफेक्ट्स और तकनीक नहीं हुआ करती थी रामसे ब्रदर्स ने अपनी बुद्धिमता और सूझ-बूझ से जो पहचान बनाई उसका कोई सानी नहीं है। रामसे ब्रदर्स अपनी फिल्मों में उन लोगों को ही भूत का किरदार दिया करते जिनके चेहरे पर ज्यादा काम करने की जरूरत न पड़े। रामसे ब्रदर्स ने ऐसे 'भारतीय' दरिंदे को ढूंढा जिसने दर्शकों में खौफ पैदा किया। अनिरुद्ध अग्रवाल ने उनकी फिल्मों में 'दरिंदे' का किरदार निभाया। उनके द्वारा निभाया गया सामरी के किरदार सबसे खूंखार था। यह रामसे बंधुओं की सबसे बड़ी हिट फिल्म 'पुराना मंदिर' का ऐसा शैतान था, जो राक्षस की पूजा करता था और इंसानों को अपना भोजन बनाता था। इतना ही नहीं दरिंदे के किरदार में ढालने के लिए किसी स्पेशल इफेक्ट नहीं बल्कि धूल मिट्टी और कीचड़ का ही इस्तेमाल किया। उस दौर में पूरा डरावना माहौल सिर्फ मेकअप से और लाइटिंग से ही क्रिएट किया जाता था।
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Veerana - फोटो : social media
कम बजट में रिकॉर्ड तोड़ कलेक्शन
हॉरर फिल्म निर्माताओं को भारत में अक्सर बजट से दो चार होना पड़ता है। इन फिल्मों में लोकेशन बहुत मायने रखता है। रामसे फिल्म को आसानी से पहचाना जा सकता है क्योंकि उनकी लोकेशन में समानता कहीं न कहीं नजर आ जाती है। रामसे ब्रदर्स की तरह अन्य हॉरर फिल्ममेकर्स प्रोफेशनल फिल्में बजट की वजह से नहीं बना पाते। रामसे खुद लो बजट फिल्में बनाने के लिए मशहूर रहे। उनकी पहली फिल्म तो 'दो गज जमीन के नीचे' केवल साढ़े तीन लाख रुपये में बनीं थी। इस फिल्म ने 45 लाख रुपये की कमाई की थी। फिल्मों का बजट इसलिए कम होता था क्योंकि जरूरत की सारी चीजें किराये पर ली जाती थीं और मास्क के जरिए ही कलाकारों को डरावना बनाने की कोशिश की जाती थी।
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Shyam Ramsay - फोटो : social media
नहीं रहे श्याम रामसे
हॉरर फिल्मों के निर्देशक श्याम रामसे का निधन हो गया। 67 वर्षीय श्याम रामसे न्यूमोनिया से पीड़ित थे। श्याम भारतीय सिनेमा में हॉरर फिल्मों की वजह से लंबे समय तक एक खास जगह रखने वाले रामसे ब्रदर्स में से एक थे। आज ही उनका अंतिम संस्कार भी किया जाएगा. माना जा रहा है कि बॉलीवुड के इस दिग्गज के अंतिम संस्कार पर इंडस्ट्री की कई बड़ी हस्तियां पहुंचेगीं।

भारत में अब भी ऐसे कई सिंगल स्क्रीन सिनेमा थियेटर्स हैं, जहां आज भी रामसे ब्रदर्स की फिल्में हाउसफुल चलती हैं।
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