श्वेता त्रिपाठी
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हमारी कहानियों की ताकत इमोशंस में हैं, न कि भाषा में'
‘मसान’ को इंटरनेशनल फेस्टिवल्स में जो सम्मान मिला, उस पर बात करते हुए श्वेता काफी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, 'मुझे हमेशा लगता है कि हमारा काम सिर्फ देश में नहीं, दुनिया भर में देखा जाना चाहिए। हम इंसान अलग-अलग भाषाएं बोल सकते हैं, अलग पहनावा हो सकता है, लेकिन इमोशंस एक जैसे होते हैं। यही हमारी कहानियों की असली ताकत है।'
प्रोड्यूसर बनने जा रही हैं श्वेता त्रिपाठी
आखिरी में श्वेता त्रिपाठी ने कहा, 'अब जब मैं खुद प्रोड्यूसर बनने जा रही हूं, तो मेरी कोशिश यही रहेगी कि जो भी कहानी चुनूं, वो दिल से निकले और सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचे, चाहे वो किसी भी देश या कल्चर से क्यों न हों।'